Narendra Modi ने 10 और 11 मई 2026 को देशवासियों से तेल और पानी का सोच-समझकर और सीमित उपयोग करने की विशेष अपील की है। यह अपील ऐसे समय में की गई है जब दुनिया में कई जगहों पर तनाव और संघर्ष जैसी स्थिति बनी हुई है, जिसे संभावित रूप से वैश्विक ऊर्जा संकट से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री की इस अपील का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका सही उपयोग बहुत जरूरी है। सरकार का मानना है कि अगर अभी से ही लोग पानी और ईंधन जैसे संसाधनों की बचत करेंगे, तो भविष्य में आने वाली कठिन परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा।
इस संदेश को एक “सामूहिक संकल्प” के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें देश के हर नागरिक की भागीदारी जरूरी बताई गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जैसे अनावश्यक वाहनों का उपयोग कम करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, पानी की बर्बादी रोकना और रोजमर्रा के कामों में सावधानी बरतना।
सरकार की तरफ से यह भी बताया गया है कि ऊर्जा और जल संसाधनों की बचत केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। अगर हर व्यक्ति अपने स्तर पर बचत करेगा, तो देश की कुल ऊर्जा खपत में काफी कमी लाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अपीलें लोगों में जागरूकता बढ़ाती हैं और समाज को जिम्मेदार बनाती हैं। खासकर तब जब वैश्विक परिस्थितियाँ अनिश्चित हों और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा हो।
लोगों से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वे इस संदेश को गंभीरता से लें और इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंच सके।
यह पहल देश में ऊर्जा और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और उन्हें भविष्य के संभावित संकटों के लिए तैयार करना है।