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बार बार फेल हो चुकी है अल-नीनो की भविष्यवाणी, क्या इस सीजन तबाह करेगा मॉनसून?

भारत में 1997-98, 1983 और 1994 में मजबूत अल-नीनो होने के बावजूद वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी फेल हुई. प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा ठंडा था. अन्य मौसमी वजहों ने मॉनसून को मजबूत किया, जिससे सामान्य या ज्यादा बारिश हुई.
पिछले सात दशकों में 17 प्रमुख अल-नीनो घटनाओं में से कम से कम 5 में भारत को सामान्य या ज्यादा बारिश मिली. 1980 के बाद से सभी अल-नीनो में सूखे की भविष्यवाणी थी, लेकिन हर अल-नीनो सूखा नहीं लाया. भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून देश की अर्थव्यवस्था और कृषि का आधार है

हर साल प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति बनती है, तो मौसम वैज्ञानिक चिंता में पड़ जाते हैं. अल-नीनो को आमतौर पर कमजोर मॉनसून और सूखे से जोड़ा जाता है. लेकिन कई बार यह भविष्यवाणी पूरी तरह गलत साबित हुई है. वैज्ञानिकों ने भारी बदलाव की भविष्यवाणी की, लेकिन असल में हुआ कुछ उल्टा. सोर्स-आजतक

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12 घंटे में चमका जंतर-मंतर, हटे 60 टन कचरे के निशान

  • जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने रिकॉर्ड 12 घंटे के भीतर व्यापक सफाई अभियान चलाया। इस दौरान 60 मीट्रिक टन से अधिक कचरा हटाया गया, सड़कों की धुलाई की गई, दीवारों पर लिखे गए नारों को मिटाया गया और क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों की मरम्मत की गई।
BY Shirin ·