दक्षिण अफ्रीका में 30 जून की तय समयसीमा से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रवासी विरोधी समूहों ने बिना दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों से देश छोड़ने की मांग की है, जिसके चलते सरकार सतर्क हो गई है।
पुलिस मंत्री फिरोज काचालिया ने सोमवार को कहा कि देशभर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी प्रांतों में व्यापक सुरक्षा योजना लागू की गई है ताकि समुदायों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाल के सप्ताहों में विदेशी नागरिकों के खिलाफ हिंसक घटनाओं में कम से कम दो लोगों की मौत हो चुकी है। कई अफ्रीकी देशों ने अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए विशेष विमान भी भेजे हैं।
प्रदर्शनकारी समूहों ने बिना कानूनी आधार के अवैध प्रवासियों को 30 जून तक देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा, धमकी, तोड़फोड़ और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रक्षा मंत्री एंजी मोटशेगा ने कहा कि सेना हवाई अड्डों और अन्य रणनीतिक स्थलों की सुरक्षा करेगी तथा जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता के लिए तैयार रहेगी।
दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से प्रवासी मजदूरों का केंद्र रहा है, लेकिन 30 प्रतिशत से अधिक बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों के कारण विदेशी नागरिकों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती रही है। कुछ राजनीतिक दल भी प्रवासियों को नौकरियों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए प्रतिस्पर्धी के रूप में पेश कर रहे हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और सामाजिक निराशा के कारण स्वयंभू निगरानी समूहों की गतिविधियां बढ़ रही हैं।
देश में पहले भी 2008, 2015, 2016 और 2019 में प्रवासी विरोधी हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई थी।
नवंबर में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है। हाल ही में चुनावी गतिविधियों के दौरान चार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे सुरक्षा चिंताएं और गहरा गई हैं।