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इज़राइल के नए मृत्युदंड कानून पर यूरोप से निलंबन का खतरा

इज़राइल द्वारा पारित नए मृत्युदंड कानून के बाद उसकी यूरोप की एक प्रमुख मानवाधिकार संस्था में स्थिति पर खतरा मंडराने लगा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह कानून लागू रहने की स्थिति में इज़राइल को निलंबन का सामना करना पड़ सकता है।


यूरोप की परिषद की संसदीय सभा की अध्यक्ष पेट्रा बायर ने कहा कि मृत्युदंड का विरोध इस संस्था की मूल शर्तों में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इज़राइल इस कानून को लागू करता है या वापस नहीं लेता, तो उसका पर्यवेक्षक दर्जा निलंबित किया जा सकता है।

यह कानून इज़राइल की संसद द्वारा पारित किया गया है, जिसमें कुछ मामलों में दोषी पाए गए फ़िलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून अलग-अलग न्यायिक प्रणालियों के कारण असमानता पैदा करता है, क्योंकि इसी तरह के मामलों में सिविल अदालतों में उम्रकैद की सज़ा दी जा सकती है।

मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों के खिलाफ है और भेदभावपूर्ण है। इस कानून को चुनौती देने के लिए इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर की जा चुकी हैं।

इज़राइल को 1957 से इस यूरोपीय संस्था में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है। हालांकि निलंबन के मामले बहुत कम होते हैं, लेकिन पहले भी उदाहरण सामने आए हैं। रूस को 2014 में क्रीमिया के विलय के बाद मतदान अधिकारों से वंचित किया गया था और बाद में उसने संगठन छोड़ दिया था।

इस मुद्दे पर आने वाले समय में और चर्चा होने की संभावना है, जिसमें मृत्युदंड के खिलाफ वैश्विक रुख और इज़राइल की नीतियों पर विचार किया जाएगा।

इज़राइल में भी इस कानून का विरोध हो रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और अदालत इस पर पुनर्विचार कर सकती है।

गौरतलब है कि इज़राइल ने 1954 में सामान्य अपराधों के लिए मृत्युदंड को लगभग समाप्त कर दिया था और दशकों से इसे लागू नहीं किया गया है। आखिरी बार 1962 में देश में मृत्युदंड दिया गया था।

यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है, जिससे इज़राइल के वैश्विक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
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