लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जारी जनवरी से अप्रैल 2026 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कुल 4,741 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में कुल 14,672 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस रिपोर्ट में बताया गया है कि दर्ज मामलों की जांच विभिन्न जिलों में तेजी से की जा रही है और कई मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी तंत्र को सक्रिय किया गया है।
रिपोर्ट में आरोपियों के सामाजिक वर्गीकरण का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कुछ समुदायों से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि यह डेटा केवल सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए है और इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय को लक्षित या कलंकित करना नहीं है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में आपसी विवाद, भूमि विवाद, पारिवारिक तनाव और स्थानीय स्तर पर तनाव जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। साथ ही कुछ मामलों में झूठी या गलत शिकायतों की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि SC-ST एक्ट जैसे कानून सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनके प्रभावी और संतुलित उपयोग के लिए निष्पक्ष जांच और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि कानून का दुरुपयोग रोकने और वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि राज्य में SC-ST एक्ट के तहत मामलों की संख्या और जांच प्रक्रिया दोनों सक्रिय हैं, जबकि प्रशासन संतुलित और पारदर्शी कार्रवाई पर जोर दे रहा है।