दुनिया भर में लोकतंत्र पर जलवायु परिवर्तन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि चरम मौसम की घटनाएं अब चुनावों को भी प्रभावित करने लगी हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार बाढ़, जंगल की आग और भीषण गर्मी जैसी आपदाएं चुनाव प्रक्रिया में बड़ी बाधा बन रही हैं।
पिछले दो दशकों में 52 देशों में कम से कम 94 चुनाव और जनमत संग्रह जलवायु से जुड़ी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। इनका असर कई रूपों में देखा गया जैसे सड़कें और मतदान केंद्र क्षतिग्रस्त होना, लोगों का विस्थापन और आखिरी समय में चुनावी व्यवस्था में बदलाव।
सिर्फ 2024 में ही 18 देशों के 23 चुनाव प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए। कई जगहों पर खराब मौसम के कारण मतदान की प्रक्रिया बदलनी पड़ी, जबकि कुछ क्षेत्रों में टूटी सड़कों और संचार व्यवस्था ने वोटिंग को मुश्किल बना दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है, खासकर उन देशों में जहां पहले से राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु जोखिम मौजूद हैं। अफ्रीका और एशिया के कई देश इस खतरे के प्रति ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं।
एक बड़ी समस्या चुनाव की तारीख तय करने को लेकर भी है। अक्सर चुनाव ऐसे समय पर रखे जाते हैं जब मौसम खराब होने की संभावना ज्यादा होती है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि मौसम को ध्यान में रखकर चुनाव की तारीख तय की जाए ताकि जोखिम कम किया जा सके।
बीते कुछ उदाहरण इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। कहीं चक्रवात ने पूरे इलाके को जलमग्न कर दिया, जिससे लोग मतदान नहीं कर पाए, तो कहीं बाढ़ के कारण चुनाव अधिकारियों को भी मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हुई।
भीषण गर्मी भी अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। अत्यधिक तापमान के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित होती है और कुछ जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक मशीनें भी सही से काम नहीं कर पातीं। बड़े शहरों में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिल रही है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ बेहतर योजना और समन्वय की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। इसमें मौसम की जानकारी, आपदा प्रबंधन और वैकल्पिक योजनाओं को चुनाव प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी बताया जा रहा है।
कुछ देशों ने इस दिशा में कदम भी उठाए हैं। कहीं चुनाव की तारीख बदली जा रही है, तो कहीं अधिकारियों को आपदा से निपटने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोकतंत्र पर इसका खतरा भी साफ नजर आने लगा है। ऐसे में निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।