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सीएम की कुर्सी छोड़ दिल्ली आ रहे सिद्धारमैया, पार्टी में नए रोल के लिए मना पाएंगे राहुल गांधी?

सीएम की कुर्सी छोड़ दिल्ली आ रहे सिद्धारमैया, पार्टी में ‘नए रोल’ के लिए मना पाएंगे राहुल गांधी?

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। Siddaramaiah के दिल्ली दौरे ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान राज्य में सत्ता संतुलन और 2028 की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नया राजनीतिक फार्मूला तैयार कर रहा है।

दिल्ली में सिद्धारमैया की मुलाकात Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से होने की संभावना है। माना जा रहा है कि चर्चा का केंद्र कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन, कैबिनेट फेरबदल और राज्यसभा चुनाव रहेंगे। 

क्या सिद्धारमैया छोड़ेंगे मुख्यमंत्री पद?

पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस हाईकमान सत्ता साझा करने के पुराने फार्मूले को लागू कर सकता है। ऐसे में डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar को मुख्यमंत्री पद सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सिद्धारमैया को पार्टी संगठन या राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने का प्रस्ताव रखा गया है।

हालांकि, सिद्धारमैया के करीबी नेताओं का कहना है कि वे राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा रुचि नहीं रखते। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने राज्यसभा सीट का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया है। 

राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती

कांग्रेस नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिद्धारमैया को “नई भूमिका” के लिए तैयार किया जा सकेगा। कर्नाटक में ओबीसी चेहरे के तौर पर उनकी मजबूत पकड़ और संगठन पर प्रभाव को देखते हुए पार्टी उन्हें पूरी तरह किनारे करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। वहीं दूसरी ओर, डीके शिवकुमार समर्थक लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सिद्धारमैया को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी जाती है, तो कांग्रेस दक्षिण भारत में सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। खासकर जाति जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी की रणनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। 

कांग्रेस क्या साधना चाहती है?

कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है—कर्नाटक सरकार में स्थिरता बनाए रखना और पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच संतुलन कायम रखना। दिल्ली की बैठक के बाद नेतृत्व परिवर्तन पर तस्वीर साफ हो सकती है। हालांकि पार्टी अभी सार्वजनिक तौर पर किसी बड़े बदलाव से इनकार कर रही है। गा कि सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति में बने रहेंगे या कांग्रेस उन्हें राष्ट्रीय मंच पर नई जिम्मेदारी देगी।

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