नई दिल्ली: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर अंदरूनी संकट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पार्टी की संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के शामिल नहीं होने के बाद नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है।
दिल्ली में आयोजित बैठक में केवल तीन लोकसभा सांसद और राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद रहे। बैठक से अनुपस्थित रहने वाले सांसदों को पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं। इसी वजह से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर संभावित टूट और दल-बदल की अटकलें तेज हो गई हैं।
बैठक के बाद संजय राउत ने अनुपस्थित सांसदों पर निशाना साधते हुए इसे पार्टी के खिलाफ साजिश और अनुशासनहीनता बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी व्हिप का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पार्टी सांसद अनिल देसाई ने कहा कि सभी अनुपस्थित सांसदों को नोटिस भेज दिया गया है और उनसे पूछा गया है कि वे बैठक में क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई उनके जवाब के आधार पर तय की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने 2022 की उस बगावत की यादें ताजा कर दी हैं, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा धड़ा अलग हो गया था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व क्या कदम उठाता है।