देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को चार सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट्स (फर्जी या साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों) से निपटने के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यह SOP सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाए ताकि पूरे देश में एक समान प्रक्रिया लागू हो सके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), RBI, बैंकों और अन्य एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों से डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई है। अदालत के अनुसार वर्ष 2024 में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 1,23,672 मामले दर्ज हुए थे, जो वर्ष 2025 में घटकर 58,249 रह गए। वहीं 30 जून 2026 तक ऐसे मामलों की संख्या 16,377 दर्ज की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि ठगी की रकम में भी कमी आई है, लेकिन साइबर अपराध की बदलती प्रकृति को देखते हुए लगातार निगरानी आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मनी रिस्टोरेशन मैकेनिज्म के जरिए अब तक 36,290 मामलों में लगभग 18.05 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए जा चुके हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ई-जीरो FIR सिस्टम फिलहाल 19 राज्यों में लागू हो चुका है, जबकि केवल 14 राज्यों ने स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित किए हैं।
CBI की जांच का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि एजेंसी ने अब तक 10 बड़े डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच शुरू की है। इनमें से एक मामले में 238 पीड़ित, 67 बैंक खाते और करीब 80 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इस मामले में 16 राज्यों के 93 स्थानों पर छापेमारी भी की गई।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- RBI चार सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट्स पर SOP तैयार कर सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे।
- सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल तथा मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल को जल्द पूरी तरह लागू करें।
- हाईकोर्ट अधीनस्थ अदालतों को इन व्यवस्थाओं की जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि बैंक खाते फ्रीज होने के मामलों में पीड़ित पहले वैकल्पिक व्यवस्था का लाभ ले सकें।
- जिन राज्यों में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर या ई-जीरो FIR सिस्टम लागू नहीं हुआ है, वे चार सप्ताह के भीतर इसे शुरू करें।
- साइबर फ्रॉड से जुड़े फ्रीज बैंक खातों के मामलों का समयबद्ध निपटारा किया जाए।
- केंद्र सरकार व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए ताकि लोग डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगी और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से परिचित हो सकें।
- बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करें जिससे डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी को रोका जा सके।
- सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की अंतर-विभागीय समिति को 'शेयर्ड लाइबिलिटी' और साइबर अपराध के पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था विकसित करने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अब तक की प्रगति संतोषजनक है, लेकिन इन व्यवस्थाओं को पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।