इजराइल में होने वाले आगामी आम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। लंबे समय से सत्ता में बने नेतन्याहू लगातार राजनीतिक चुनौतियों कानूनी मामलों और जन असंतोष का सामना कर रहे हैं।
हाल के महीनों में गाजा युद्ध सुरक्षा मुद्दों और सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए हैं। कई सर्वेक्षणों में विपक्ष को पहले की तुलना में मजबूत स्थिति में दिखाया गया है हालांकि अंतिम नतीजे चुनाव प्रचार और गठबंधन की राजनीति पर निर्भर करेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष एकजुट रहता है तो नेतन्याहू के लिए सत्ता में वापसी आसान नहीं होगी। वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर उनका अनुभव अब भी उन्हें मजबूत नेता बनाता है।
इजराइल की राजनीति में गठबंधन सरकारों की अहम भूमिका होती है इसलिए केवल सबसे बड़ी पार्टी बनने से सरकार बनना तय नहीं होता। चुनाव परिणाम के बाद छोटे दलों का समर्थन नई सरकार के गठन में निर्णायक साबित हो सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं बल्कि इजराइल की भविष्य की नीतियों और क्षेत्रीय रणनीति की दिशा तय करने वाला चुनाव भी साबित हो सकता है।