Latest News Lifestyle
लेबनान के 'ब्लैक बुधवार' हमलों में नागरिकों की मौत पर उठे सवाल

8 अप्रैल को लेबनान में हुए इज़राइली हवाई हमलों की एक श्रृंखला, जिसे अब “ब्लैक बुधवार” कहा जा रहा है, ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि असल में निशाना कौन था, क्योंकि सामने आ रहे सबूत बताते हैं कि बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हो सकते हैं।


कुछ ही मिनटों में लेबनान के कई इलाकों पर किए गए इन हमलों में कम से कम 357 लोगों की मौत हुई। इज़राइल ने दावा किया कि इनमें से करीब 250 लोग हिज़्बुल्लाह के सदस्य थे। हालांकि, स्वतंत्र शोधकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य इस दावे की स्पष्ट पुष्टि नहीं करते।

स्थानीय लोगों ने तबाही और अफरा-तफरी के दृश्य बताए। बेरूत के तलत अल-खयात इलाके में, जो हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुआ, इमारतें मलबे में बदल गईं और विस्फोटों से खिड़कियां टूट गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले बिना किसी चेतावनी के दिन के समय हुए, जब बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।

विशेषज्ञों ने हमलों के तरीके पर भी चिंता जताई है। निगरानी समूहों के अनुसार, बहुत कम समय में 100 से अधिक हवाई हमले किए गए और 160 से ज्यादा बम गिराए गए। हमलों के इस पैमाने और समय को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या नागरिकों को बचाने के लिए पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं।

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि हमलों का पैटर्न अंधाधुंध बल प्रयोग की ओर इशारा करता है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें शिक्षक, पत्रकार और रेस्तरां कर्मचारी भी थे। कई मामलों में पूरे परिवार के मारे जाने की खबर है।

मृतकों में हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों की सही संख्या की पुष्टि करना मुश्किल है, क्योंकि संगठन ने अपने नुकसान का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, नागरिकों की बड़ी संख्या में मौत ने आधिकारिक दावों पर संदेह पैदा कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, किसी भी संघर्ष में नागरिकों और सैन्य लक्ष्यों के बीच स्पष्ट अंतर करना जरूरी होता है। अगर कोई सैन्य लक्ष्य मौजूद भी हो, तो हमले संतुलित होने चाहिए और नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन मानकों का पालन न करना युद्ध कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब लेबनान में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। हाल के महीनों में सैन्य कार्रवाई तेज हुई है, खासकर दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही और विस्थापन हुआ है।

मानवाधिकार संगठनों की बढ़ती चिंताओं के बावजूद जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह आशंका बढ़ जाती है कि ऐसी घटनाएं आगे भी जारी रह सकती हैं।

हालांकि कुछ समय के लिए युद्धविराम की घोषणाएं हुई हैं, लेकिन दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों में हिंसा जारी है। “ब्लैक बुधवार” की घटनाओं ने आम लोगों में डर बढ़ा दिया है, क्योंकि उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
News Image

ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव: सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त गोपनीयता नियमों पर विवाद

  • ड्राफ्ट नोटिस के अनुसार, यह समझौता संघीय कर्मचारियों पर व्यापक रूप से लागू होगा और इसमें सूचना साझा करने के दायरे को काफी सीमित किया गया है। इससे पहले आम तौर पर एनडीए केवल विशेष सुरक्षा या खुफिया एजेंसियों तक सीमित होते थे,
BY Himanshu Dubey ·
News Image

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते सवालों के बीच RSS का वैश्विक अभियान शुरू

  • भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंसा के आरोपों के बीच RSS ने अमेरिका और यूरोप में अपना वैश्विक संपर्क अभियान तेज किया।
BY Saba Parveen ·