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ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता पर संकट, ट्रंप बोले- बातचीत खत्म हुई तो मुझे परवाह नहीं

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता पर संकट, ट्रंप बोले- "बातचीत खत्म हुई तो मुझे परवाह नहीं"

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता के भविष्य को लेकर बेपरवाह रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि बातचीत समाप्त हो जाती है तो उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि वार्ता "बेहद उबाऊ" हो चुकी थी और यदि यह खत्म हो जाए तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अगर बातचीत खत्म हो गई है, तो हो गई है। मुझे सच कहूं तो इसकी कोई परवाह नहीं है।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि तेहरान ने लेबनान में इजरायल के बढ़ते सैन्य अभियान के विरोध में अमेरिका के साथ संपर्क रोक दिया है।

वार्ता पर बढ़ा संकट

हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए थे कि ईरान के साथ एक समझौता करीब है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम करने और युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर चर्चा चल रही थी। हालांकि अब वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत ज्यादा समय लिया। सच कहूं तो यह बातचीत अब उबाऊ होने लगी थी।"

तेल कीमतों पर नहीं चिंता

ईरान द्वारा बातचीत रोकने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि उन्हें तेल की बढ़ती कीमतों की चिंता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि निकट भविष्य में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

ईरान का विरोध

ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान ने इजरायल के लेबनान में सैन्य अभियान और हिजबुल्लाह पर हमलों के विरोध में अमेरिकी वार्ताकारों से संवाद बंद करने का फैसला किया है। ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय हालात सामान्य हुए बिना बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

ट्रंप का यू-टर्न?

हालांकि सीएनबीसी को दिए बयान के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत "तेज गति" से जारी है। इससे यह संकेत मिला कि वार्ता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में कहा था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करे और संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे।

दूसरी ओर, ईरानी नेतृत्व लगातार कहता रहा है कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार उसके लिए गैर-समझौतावादी मुद्दा है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मध्य पूर्व में बढ़ सकती है अस्थिरता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता पूरी तरह विफल हो जाती है तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इसका असर वैश्विक तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर बने रहते हैं या फिर तनाव का नया दौर शुरू होता है।

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