नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर ₹84,084 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडार तलाशना है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% और प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50% आयात के जरिए पूरी करता है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। इसी उद्देश्य से 'समुद्र मंथन' योजना के तहत हाई-रिस्क डीपवॉटर ड्रिलिंग, अत्याधुनिक सिस्मिक सर्वे और अपतटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अन्वेषण को बढ़ावा दिया जाएगा।
योजना के तहत समुद्री बेसिनों में आधुनिक तकनीकों की मदद से व्यापक सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और गहरे समुद्र में अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज की संभावना बढ़ेगी और आने वाले वर्षों में घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में अंडमान सागर समेत कई अपतटीय क्षेत्रों में मिले सकारात्मक संकेतों ने भारत की ऊर्जा संभावनाओं को मजबूत किया है। यदि इन क्षेत्रों में व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू होता है तो न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि विदेशी मुद्रा पर आयात का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही यह योजना निवेश, रोजगार और ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को भी गति दे सकती है।