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परीक्षा माफियाओं की खैर नहीं! फास्ट-ट्रैक कोर्ट में खुलेंगे वर्षों पुराने पेपर लीक के राज

नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई अब नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा संबंधी अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था के तहत केवल हालिया मामले ही नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित कई चर्चित परीक्षा घोटालों की सुनवाई भी तेज की जा सकती है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, फास्ट-ट्रैक कोर्ट का उद्देश्य उन मामलों का शीघ्र निपटारा करना है, जिनमें जांच पूरी हो चुकी है या अभियोजन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इससे लंबे समय से लंबित मुकदमों में तेजी आने की उम्मीद है और दोषियों को जल्द सजा दिलाई जा सकेगी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि पिछले कई वर्षों में पेपर लीक का नेटवर्क अलग-अलग राज्यों तक फैल चुका है। कई मामलों में संगठित गिरोह, तकनीकी विशेषज्ञ, बिचौलिए और परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों की मिलीभगत सामने आई है। डिजिटल माध्यमों, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, सॉल्वर गैंग और अवैध आर्थिक लेनदेन के जरिए प्रश्नपत्र लीक करने के नए तरीके भी जांच के दायरे में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसियां पुराने मामलों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, मोबाइल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी दोबारा समीक्षा कर रही हैं। यदि किसी पुराने मामले में नए सबूत सामने आते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना उसकी प्राथमिकता है। इसी दिशा में परीक्षा संचालन प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने, प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने, एन्क्रिप्शन तकनीक के उपयोग, परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाने तथा तकनीकी ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं होंगे। परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुधार, जवाबदेही तय करना, समयबद्ध जांच और शीघ्र न्याय व्यवस्था ही भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगा सकती है। उनका कहना है कि यदि दोषियों को कम समय में सजा मिलती है तो इससे परीक्षा माफियाओं के खिलाफ मजबूत संदेश जाएगा।

इस बीच विपक्ष लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का दावा है कि नई कानूनी व्यवस्था और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से परीक्षा से जुड़े अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा।

फिलहाल NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि इस बहुचर्चित मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कितनी व्यापक कार्रवाई होती है।

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इलाहाबाद HC: हर्ष फायरिंग के लिए नहीं है लाइसेंसी हथियार

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस विशेष अधिकार है, इसका उपयोग हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड रखना भी लाइसेंस धारकों की कानूनी जिम्मेदारी बताया।
BY ROSHANI MANDAL ·