नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्ष के हंगामे के कारण इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी, लेकिन सरकार ने इसे आवश्यक प्रशासनिक सुधार बताते हुए सदन से मंजूरी दिला दी।
सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और समयबद्ध बनाना है। इसके माध्यम से फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने, डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने और सरकारी डेटाबेस को अधिक सटीक बनाने का प्रयास किया जाएगा।
नए प्रावधानों के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा के काफी बाद कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) से आदेश प्राप्त करना होगा। पहले कई मामलों में प्रशासनिक स्तर पर अनुमति देकर पंजीकरण किया जा सकता था, लेकिन अब प्रक्रिया अधिक सख्त बनाई गई है।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना कम होगी और सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, पहचान, सामाजिक योजनाओं और संपत्ति से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जाते हैं।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कराया। विपक्षी दलों का कहना था कि ऐसे विधेयकों पर विस्तृत बहस होनी चाहिए ताकि राज्यों और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा हो सके।
विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू होगा। इसके बाद केंद्र सरकार संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी करेगी और राज्यों को नई प्रक्रिया लागू करने के निर्देश दिए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। देरी की स्थिति में नागरिकों को अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, इसलिए लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराने की सलाह दी जा रही है।