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पहले F-16 का शिकार, फिर वो 58 घंटे जब अभिनंदन पाकिस्तान की जमीन पर दहाड़े

 

 

नई दिल्ली: फरवरी 2019 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हवाई कार्रवाई की। इसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। इसी दौरान भारतीय और पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई।

इस कार्रवाई में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तानी विमानों का पीछा किया। भारतीय पक्ष के अनुसार, इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी F-16 को निशाना बनाया। हालांकि F-16 के गिराए जाने को लेकर पाकिस्तान ने अलग दावा किया और बाद में इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस हुई।

मुठभेड़ के दौरान अभिनंदन का मिग-21 भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह पैराशूट के जरिए पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में जा गिरे। इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया।

पाकिस्तानी जमीन पर भी नहीं टूटा हौसला

गिरफ्तारी के बाद सामने आए वीडियो में अभिनंदन बेहद संयमित और आत्मविश्वास से भरे नजर आए। कठिन परिस्थिति के बावजूद उनके चेहरे पर घबराहट के बजाय दृढ़ता दिखाई दी। उनकी वर्दी, मूंछ और बेबाक अंदाज ने उन्हें भारत में रातोंरात चर्चा का केंद्र बना दिया।

भारत सरकार ने उनकी सुरक्षित और तत्काल वापसी की मांग की। देशभर में उनके परिवार और भारतीय वायुसेना के समर्थन में लोगों ने प्रार्थनाएं कीं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों परमाणु शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता बढ़ रही थी।

करीब 58 घंटे बाद हुई वतन वापसी

लगभग 58 घंटे तक पाकिस्तान की हिरासत में रहने के बाद 1 मार्च 2019 को अभिनंदन को भारत को सौंप दिया गया। वाघा-अटारी सीमा पर उनकी वापसी का दृश्य देशभर में देखा गया। जैसे ही उन्होंने भारतीय जमीन पर कदम रखा, उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग सीमा पर मौजूद थे।

अभिनंदन की वापसी सिर्फ एक सैनिक की घर वापसी नहीं थी, बल्कि उस दौर में भारत-पाकिस्तान के बीच बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई। उनके संयम, साहस और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें भारतीयों के बीच एक यादगार नाम बना दिया।

आज भी फरवरी 2019 की घटनाओं को याद करते हुए अभिनंदन का नाम उस दौर के साहस और धैर्य के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है।

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इलाहाबाद HC: हर्ष फायरिंग के लिए नहीं है लाइसेंसी हथियार

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस विशेष अधिकार है, इसका उपयोग हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड रखना भी लाइसेंस धारकों की कानूनी जिम्मेदारी बताया।
BY ROSHANI MANDAL ·