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खाड़ी की आग, भारत की जेब पर वार ईरान-इज़राइल युद्ध का आर्थिक प्रभाव

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद से तनाव निरंतर जारी है 40 दिन मुसलसल जंग के बाद 14 सूत्रीय मसौदा तैयार किया गया जिसके लिए पाकिस्तान में कई बार शांति वार्ता हुई जो की असफल रही सूत्रों की माने तो ईरान अपनी एक भी शर्त से झुकने के लिए तैयार नहीं है वही जैसे ही शांति की बात सामने आती है तभी इसराइल के माध्यम से दक्षिणी लेबनन पर हमले तेज़ हो जाते है मानो जैसे की इसराइल जंग को जारी रखना चाहता है  कयास लगाया जा रहा है की अमेरिका में होने वाले मिड टर्म इलेक्शन में ट्रम्प को इस जंग से काफी नुकसान हो सकता है इसलिए वो इस जंग को अपनी शर्तो के मुताबिक बंद करवाना चाहते है ताकि इलेक्शन में इससे फ़ायदा उठाया जा सके, वही इसराइल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जंग को जारी रखना चाहते है ताकि उनकी सत्ता बची रहे इसराइल में भी अगस्त के आस पास इलेक्शन होने है लेकिन संघर्ष जारी रहता है तो इस स्थिति में नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रहेंगे| इस जंग से इसराइल और अमेरिका अपना फायदा देख रहे है लेकिन संघर्ष जारी रहने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापर प्रभावित हो रहा है|

     पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और हाल के महीनों में अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, मुद्रा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में दोहरी नाकेबंदी के कारण तेल के दाम लगातार बढ़ रहे है जिससे भारत जो की अपना 80% तेल आयत करता है उसे महंगे दामों में कच्चे तेल के आयत से विदेशी मुद्रा भण्डारो में कमी आयी है जिससे भारत की आर्थिक स्थिति सीधे प्रभावित हो रही है व बाजार में हर वस्तु की कीमतों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है  जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है कई अर्थशास्त्रीओ का मानना है की ये महंगाई अभी और बढ़ेगी जंग अगर जल्द ही बंद भी हो जाती है तो स्तिथि को सामान्य होने में कई महीनो का समय लगेगा जिससे भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था जिसका अधिकतर व्यापर खाड़ी के देशो के साथ होता है सीधे प्रभावित होंगे व महंगाई लगातार बढ़ती रहेगी इसी कारण खाड़ी में चल रही जंग सीधे आपकी जेब पर असर डाल रही है

    ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ फसलों की बुआई शुरू हो गई है वही खाद की कमी के कारण किसानो की लम्बी लम्बी कतारे खाद वितरण भण्डारो के बाहर देखि जा सकती है भारत यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है। युद्ध के कारण गैस और उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ गया है।वही खाद भी महंगी होने से आने वाले समय में खाद्दान पदार्थो की कीमतों में भी इज़ाफ़ा होने की सम्भावना है जिससे ये वैश्विक आर्थिक संकट सीधे आपकी खाने की थाली तक पहुँच जायेगा | युद्ध के कारण समुद्री मार्गों में जोखिम बढ़ गया है। भारतीय निर्यातकों को सामान भेजने में अधिक समय और अधिक लागत का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग सामान, वस्त्र, रसायन और कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रभाव पड़ सकता है।  युद्ध हजारों किलोमीटर दूर हो रहा है, लेकिन इसका असर भारतीय नागरिकों तक पहुंच रहा है। इस प्रकार आम नागरिक अप्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध का आर्थिक बोझ झेल रहा है। 

लेखक: Aqdash Siddiqui

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ईरान-अमेरिका वार्ता के संकेत, लेबनान-इज़राइल युद्धविराम फिर बढ़ा

  • ईरान ने कहा है कि अमेरिका नई बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है, जबकि लेबनान और इज़राइल ने 45 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमति जताई है।
BY Saba Parveen ·