Latest News Lifestyle
CJP प्रदर्शन के बाद वार्ता प्रस्ताव पर बढ़ा सियासी विवाद

 


*नई दिल्ली:* दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के बाद हुए विवाद के बीच सरकार और संगठन के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों और तनावपूर्ण माहौल के बाद अब वार्ता को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  


  सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति को सामान्य बनाने के उद्देश्य से CJP नेतृत्व को सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया था। सूत्रों का दावा है कि यह प्रस्ताव आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दिया गया था। हालांकि, सरकारी पक्ष का कहना है कि CJP नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

  

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रदर्शन के बीच हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें दो सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भी शामिल बताए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।


दूसरी ओर, CJP ने सरकारी दावों को अपने तरीके से स्पष्ट किया है। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि बुधवार सुबह पुलिस के माध्यम से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर वार्ता का संदेश मिला था। उन्होंने कहा कि संगठन ने उस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनका मानना था कि बातचीत आंदोलन स्थल जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर ही होनी चाहिए।


प्रवक्ता के अनुसार, संगठन बातचीत के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह ऐसी जगह पर संवाद चाहता है जहां दोनों पक्ष समान परिस्थितियों में अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तटस्थ स्थान पर वार्ता के लिए तैयार होती है, तो संगठन भी बातचीत के लिए तैयार रहेगा।


फिलहाल सरकार और CJP के बीच बातचीत को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आंदोलन की आगे की दिशा और संभावित वार्ता को लेकर सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है, जबकि संगठन अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहा है।

News Image

मीठे ड्रिंक्स और चिप्स पर चेतावनी लेबल का प्रस्ताव, कंपनियों ने जताया विरोध

  • भारत में पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों पर अधिक चीनी, नमक और वसा की मात्रा को लेकर चेतावनी लेबल लगाने की बहस तेज हो गई है। सरकार की ओर से ऐसे लेबल की व्यवस्था पर विचार किया गया, लेकिन खाद्य कंपनियों ने इसका विरोध किया। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी होने से लोग अधिक सोच-समझकर खाद्य पदार्थों का चुनाव कर सकेंगे।
BY ·
News Image

19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन, भावुक होकर कही बड़ी बात

  • बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उन्होंने इसे अपने घर और देश लौटने जैसा अनुभव बताया। उनकी यात्रा के साथ ही राज्य की राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है।
BY ·