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चढ़ावा विवाद पर अखिलेश का BJP पर बड़ा हमला, लगाए गंभीर आरोप

 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए भाजपा पर धार्मिक आस्था और चंदे के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए।


अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल घटनाओं का क्रम नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थाओं के नाम पर चंदा और दान एकत्र किया जाता है, लेकिन बाद में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में सबूतों को कमजोर करने और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।

सपा प्रमुख ने कहा कि देश के नागरिकों को धार्मिक और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े आर्थिक मामलों में पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से मूल मुद्दों से ध्यान हटाया जाता है।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी और लोगों को तथ्यों के आधार पर जागरूक करेगी। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सार्वजनिक संस्था से जुड़े आर्थिक मामलों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता आवश्यक है।

इसी दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी भावुक अपील की। अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहना चाहिए, लेकिन किसी भी आंदोलनकारी का जीवन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने और स्वस्थ रहकर अपनी लड़ाई जारी रखने का आग्रह किया।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जबकि मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां जारी हैं।
 
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मीठे ड्रिंक्स और चिप्स पर चेतावनी लेबल का प्रस्ताव, कंपनियों ने जताया विरोध

  • भारत में पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों पर अधिक चीनी, नमक और वसा की मात्रा को लेकर चेतावनी लेबल लगाने की बहस तेज हो गई है। सरकार की ओर से ऐसे लेबल की व्यवस्था पर विचार किया गया, लेकिन खाद्य कंपनियों ने इसका विरोध किया। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी होने से लोग अधिक सोच-समझकर खाद्य पदार्थों का चुनाव कर सकेंगे।
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19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन, भावुक होकर कही बड़ी बात

  • बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उन्होंने इसे अपने घर और देश लौटने जैसा अनुभव बताया। उनकी यात्रा के साथ ही राज्य की राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है।
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