सोमालिया के तट के पास समुद्री लूटपाट की एक नई लहर ने दुनिया की सबसे खतरनाक समुद्री चुनौतियों में से एक की वापसी की आशंका पैदा कर दी है। कुछ ही दिनों में कई जहाजों के अपहरण की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और यह सवाल खड़ा किया है कि इस बढ़ोतरी के पीछे कारण क्या हैं।
अपहरण की अचानक बढ़ोतरी
अप्रैल के अंत से उत्तरी सोमालिया के पास के समुद्री इलाकों में कम से कम तीन से चार व्यापारिक जहाजों को कब्जे में लिए जाने की खबर है। इनमें मछली पकड़ने वाली नावें और तेल टैंकर शामिल हैं, जिनमें भारी मात्रा में सामान और विभिन्न देशों के चालक दल मौजूद थे।
समुद्री सुरक्षा पर नजर रखने वाली एजेंसियां, जैसे यूरोपीय संघ नौसैनिक बल, ने कई घटनाओं की पुष्टि की है और कब्जे में लिए गए जहाजों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इस क्षेत्र में खतरे का स्तर “उच्च” कर दिया है और जहाजों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है।
हमलों के पीछे कौन है?
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन हालिया हमलों के पीछे कौन से समूह हैं। ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में समुद्री लूट में स्थानीय मछुआरे, आपराधिक नेटवर्क और कुछ सशस्त्र समूह शामिल रहे हैं, जिनका संबंध चरमपंथी संगठनों से भी बताया जाता है।
मौजूदा हमले अवसरवादी नजर आते हैं, जो कम नौसैनिक निगरानी और बढ़ती समुद्री असुरक्षा का फायदा उठा रहे हैं। कुछ जहाजों को पंटलैंड जैसे अर्ध-स्वायत्त क्षेत्रों के तट के पास रोका गया है, जहां कानून लागू करने की क्षमता सीमित है।
क्या ईरान संघर्ष इसका कारण है?
ईरान और वैश्विक शक्तियों के बीच जारी तनाव अप्रत्यक्ष रूप से समुद्री लूट की वापसी में भूमिका निभा सकता है।
जो नौसैनिक बल पहले सोमालिया के पास समुद्री लूट के खिलाफ सक्रिय थे, वे अब अपनी प्राथमिकताएं बदलकर लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में तैनात हो गए हैं, जहां भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
इस बदलाव के कारण सोमालिया के आसपास समुद्री सुरक्षा में कमी आई है, जिससे समुद्री लुटेरों को कम जोखिम के साथ काम करने का मौका मिल रहा है।
साथ ही, मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे ईंधन ले जाने वाले जहाज अधिक आकर्षक लक्ष्य बन गए हैं। अब टैंकर लुटेरों के लिए बड़े मुनाफे का साधन बन सकते हैं।
पुराना पैटर्न फिर उभर रहा है
सोमालिया के तट पर समुद्री लूट कोई नई समस्या नहीं है। 2000 के दशक की शुरुआत में यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री अपराध का केंद्र बन गया था। अपने चरम पर, इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया।
बाद में, नाटो और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियानों के जरिए इस संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया गया। इन प्रयासों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा में सुधार हुआ और अपहरण की घटनाएं कम हो गईं।
हालांकि, समुद्री लूट पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। बीच-बीच में घटनाएं होती रही हैं, और हालिया हमले यह संकेत देते हैं कि हालात फिर से लुटेरों के पक्ष में बनते जा रहे हैं।
अब यह क्यों महत्वपूर्ण है
समुद्री लूट की यह वापसी ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार मार्ग पहले ही भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव में हैं। सोमालिया के पास का समुद्री क्षेत्र एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए इसकी सुरक्षा वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी है।
अगर यह रुझान जारी रहता है, तो इससे शिपिंग लागत बढ़ सकती है, बीमा प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है और पहले से दबाव झेल रही आपूर्ति श्रृंखलाओं पर और असर पड़ सकता है।
बढ़ती चिंता
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि समुद्री लूट का पुराना संकट पूरी तरह लौट आया है, लेकिन हालिया घटनाएं एक स्पष्ट चेतावनी हैं। कम होती नौसैनिक निगरानी, बढ़ती तेल कीमतें और बदलती वैश्विक प्राथमिकताएं ऐसे हालात बना रही हैं जिनका फायदा समुद्री लुटेरे उठा रहे हैं।
यह देखना बाकी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है और क्या समुद्री सुरक्षा को फिर से संतुलित कर इस बढ़ते खतरे को रोका जा सकता है।