राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ती ईंधन खपत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने कई बड़े कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार ने सभी विभागों को फ्यूल बचत के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरे फिलहाल रद्द कर दिए गए हैं, जबकि कार्यालयों में ‘नो कार डे’ लागू करने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली जल बोर्ड और बाढ़ एवं सिंचाई विभाग सहित कई विभागों को ईंधन की खपत कम करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे सरकारी वाहनों का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें। साथ ही अनावश्यक यात्रा और वाहन उपयोग पर रोक लगाने के लिए निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
सरकार ने सप्ताह में एक दिन ‘नो कार डे’ मनाने का फैसला किया है। इस दिन अधिकारी और कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पेट्रोल और डीजल की बचत होगी, बल्कि दिल्ली में प्रदूषण स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी।
इसके अलावा सभी विभागों को बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। कार्यालयों में ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग और अनावश्यक बिजली खर्च रोकने पर जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए यह कदम जरूरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्तर पर इस तरह की पहल सफल रहती है, तो आम लोगों में भी ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।
दिल्ली सरकार के ये फैसले आने वाले समय में राजधानी को अधिक स्वच्छ, हरित और ऊर्जा-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।