संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत फू कॉन्ग ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा सुरक्षा स्थिति इस तरह की वापसी के लिए अनुकूल नहीं है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बोलते हुए फू कॉन्ग ने कहा कि लेबनान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं और इसे वास्तविक संघर्षविराम नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह केवल लड़ाई के कम स्तर का संकेत है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल, जिसे यूनिफिल कहा जाता है, को हटाने की योजना पर दोबारा विचार करना जरूरी है।
फू कॉन्ग ने संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई सदस्य भी मानते हैं कि मिशन समाप्त करने का यह सही समय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन जून में आने वाली संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की रिपोर्ट का इंतजार करेगा, जिसके बाद वह अपना अंतिम रुख तय करेगा।
उन्होंने इजरायल से लेबनान पर हमले रोकने की अपील भी की और कहा कि तनाव कम करना तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
यूनिफिल की स्थापना 1978 में लेबनान पर इजरायली आक्रमण के बाद सैनिकों की वापसी की निगरानी के लिए की गई थी। बाद में 2006 के इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्ध के बाद इसकी भूमिका का विस्तार किया गया और इसे दोनों पक्षों के बीच एक बफर जोन बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई।
लंबे समय से मौजूदगी के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले साल इस मिशन के लगभग 10,800 शांति सैनिकों को धीरे-धीरे वापस बुलाने का फैसला किया था, जिसके तहत दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से मिशन समाप्त करने की योजना है।
हालांकि, जमीन पर स्थिति और खराब हो गई है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से इजरायली हमलों में 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
यूनिफिल को भी नुकसान झेलना पड़ा है। अब तक कम से कम छह शांति सैनिक मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। इनमें इंडोनेशिया और फ्रांस के सैनिक भी शामिल हैं, जो गोलाबारी और सड़क किनारे हमलों की चपेट में आए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि शांति सैनिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते समय हमलों का शिकार हो रहे हैं, जिसमें बिना फटे गोला-बारूद को हटाना और लॉजिस्टिक सहायता देना शामिल है।
बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है कि अगर शांति मिशन को वापस लिया गया, तो पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र और अधिक अस्थिर हो सकता है।