ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने उस गलती के लिए माफी मांगी है, जिसमें कंपनी ने एक ऐसे किशोर से जुड़ी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी अधिकारियों को नहीं दी, जिसने बाद में कनाडा में एक घातक गोलीबारी को अंजाम दिया।
हमलावर, 18 वर्षीय जेसी वैन रूटसेलार, ने 10 फरवरी को ब्रिटिश कोलंबिया के टम्बलर रिज में गोलीबारी की, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में उसके परिवार के सदस्य और एक स्थानीय स्कूल के छात्र भी शामिल थे। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया और इसे हाल के समय की सबसे गंभीर हिंसक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। बाद में हमलावर की मौत खुद की गोली से हुई।
घटना के बाद ओपनएआई ने बताया कि संदिग्ध का चैटजीपीटी अकाउंट महीनों पहले ही हिंसक गतिविधियों से जुड़े दुरुपयोग के कारण चिन्हित कर लिया गया था और उसे बंद भी कर दिया गया था। हालांकि, उस समय कंपनी ने यह जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नहीं दी, क्योंकि उनके अनुसार यह मामला तत्काल खतरे की श्रेणी में नहीं आता था।
समुदाय के नेताओं को लिखे एक पत्र में ऑल्टमैन ने माना कि अकाउंट चिन्हित होने के बाद अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए था। उन्होंने अपने फैसले पर गहरा खेद जताते हुए कहा कि माफी से नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन पीड़ितों के परिवारों और पूरे समुदाय के दर्द को समझना जरूरी है।
ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि कंपनी अपने सुरक्षा उपायों को बेहतर बनाने और सरकारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने इस घटना से सीख लेने और संभावित खतरों की पहचान और प्रतिक्रिया की प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया।
ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने पुष्टि की कि इस मामले को लेकर ओपनएआई के साथ बातचीत हुई है, जिसमें समुदाय पर पड़े असर और जवाबदेही की जरूरत को सामने रखा गया। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों के गुस्से और दुख को रेखांकित करते हुए ऑनलाइन खतरनाक गतिविधियों की निगरानी के बेहतर उपायों की मांग की।
इस घटना ने टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर बहस को और तेज कर दिया है, खासकर तब जब उनके प्लेटफॉर्म पर संभावित रूप से खतरनाक गतिविधियां सामने आती हैं। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि ऐसी जानकारी कब और कैसे अधिकारियों के साथ साझा की जानी चाहिए।
ओपनएआई ने कहा है कि वह अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है, ताकि भविष्य में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।