उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्य इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज गर्मी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ग्रामीण और शहरी इलाकों से लगातार कटौती और लो-वोल्टेज की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में बिजली संकट अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बिजली व्यवस्था संभालने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों और कस्बों में लंबे समय तक बिजली कटौती की जा रही है, जबकि सरकार बेहतर व्यवस्था के दावे कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि भीषण गर्मी में जनता परेशान है और सरकार केवल विज्ञापन में व्यस्त है।
वहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस दौर में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों, मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मायावती ने सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता की शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधारने और ट्रांसफॉर्मर खराब होने की स्थिति में तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए बिजली उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए ताकि जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग के बीच आने वाले दिनों में बिजली व्यवस्था सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।
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