Latest News Lifestyle
1034 से 2026 तक: भोजशाला मंदिर-मस्जिद विवाद पर कोर्ट का अंतिम फैसला!

भोजशाला को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद आखिरकार 2026 में एक बड़े न्यायिक मोड़ पर पहुंचा, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर मूल रूप से मंदिर है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष को अलग भूमि देने का सुझाव देते हुए कहा कि वे इसके लिए सरकार के समक्ष याचिका दायर कर सकते हैं।

यह विवाद केवल एक धार्मिक स्थल का नहीं, बल्कि इतिहास, पुरातत्व, आस्था और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताकर नमाज के अधिकार का दावा करता रहा है।

राजा भोज से अदालत तक : विवाद की प्रमुख टाइमलाइन

 1010–1055: राजा भोज का शासनकाल। धार को विद्या और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनाया गया।
 1034: सरस्वती सदन अथवा भोजशाला के निर्माण का उल्लेख मिलता है।
 1305–1409: मालवा पर आक्रमणों के दौरान परिसर की मूल संरचना में बदलाव होने के दावे सामने आए।
 1459: कमाल मौला से जुड़ी संरचना और मस्जिद स्वरूप के उल्लेख मिलने लगे।
 1875: खुदाई के दौरान वाग्देवी (सरस्वती) प्रतिमा मिलने का दावा किया गया।
 1909: ब्रिटिश प्रशासन ने परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया।
 1934: भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद को लेकर प्रशासनिक आदेश जारी हुए।
 1952: वसंत पंचमी पर भोज उत्सव आयोजित किया गया।
 2003: प्रशासन ने पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग दिन तय किए।
 2022: मामले में नई रिट याचिका हाई कोर्ट में दाखिल हुई।
 2024 : अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया।
 2026: हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर माना।

एएसआई सर्वे में क्या मिला?

ASI की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में परिसर में मंदिर शैली के कई अवशेष मिलने का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार—

 मूर्तियां, स्तंभ और शिलालेख प्राप्त हुए
 स्थापत्य सामग्री में प्राचीन मंदिर शैली के संकेत मिले
 वर्तमान ढांचे में पूर्ववर्ती संरचनाओं के अवशेष उपयोग होने की बात कही गई
 ⁠सर्वे में खुदाई, वैज्ञानिक परीक्षण और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया

रिपोर्ट ने अदालत में विवाद के ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।