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आलू किसान बेहाल! अखिलेश का तंज, पूछा- 1 रुपये किलो आलू में कैसे बनेगी ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी?

 

कन्नौज: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में आलू किसानों की फसल के उचित दाम को लेकर चिंता बढ़ती नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। कम कीमत मिलने से खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव ने आलू किसानों की स्थिति को लेकर सरकार से सवाल करते हुए तंज कसा कि जब किसानों को आलू की कीमत महज 1 रुपये प्रति किलो मिल रही है, तो ऐसे में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य कैसे हासिल होगा।

आलू की कीमत को लेकर किसानों की चिंता

कन्नौज और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती पर निर्भर हैं। किसानों के लिए आलू की कीमत में गिरावट सीधे उनकी आय को प्रभावित करती है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन समेत कई तरह की लागत आती है। ऐसे में बाजार में कम कीमत मिलने पर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल का ऐसा दाम मिलना चाहिए जिससे उत्पादन की लागत निकल सके और मेहनत का उचित मुनाफा भी मिल सके। कीमतों में गिरावट के कारण कई किसान अपनी फसल को लेकर परेशान हैं।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने आलू की कम कीमत का जिक्र करते हुए पूछा कि “1 रुपये के आलू में 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी कैसे बनेगी?”

अखिलेश यादव का यह सवाल किसानों की आय और प्रदेश की आर्थिक विकास नीति को लेकर सरकार पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। सपा प्रमुख ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए सरकार से उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है।

कन्नौज में आलू का खास महत्व

कन्नौज उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान आलू की खेती करते हैं और उनकी आय का एक हिस्सा इसी फसल पर निर्भर करता है। ऐसे में आलू की कीमत में उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्थानीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

किसानों के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बाजार में उचित कीमत मिलना भी जरूरी है। यदि फसल की कीमत लागत से नीचे चली जाती है तो उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पाती।

चुनावी राजनीति में भी मुद्दा बन सकता है किसान

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। आलू, गन्ना और दूसरी कृषि उपज की कीमत को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है।

आलू किसानों की परेशानी को लेकर अखिलेश यादव का बयान इसी राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाता है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की कम कीमत की शिकायतों को लेकर क्या कदम उठाती है और बाजार में आलू के दाम को लेकर आने वाले दिनों में क्या स्थिति बनती है।

किसानों की मांग साफ है कि उनकी फसल का ऐसा मूल्य तय हो जिससे खेती की लागत निकल सके और उन्हें अपनी मेहनत का उचित लाभ मिल सके। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जोड़कर सवाल उठा रहा है।