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गुमशुदा व्यक्ति चाहे बच्चा हो या बड़ा, पुलिस को तुरंत दर्ज करनी होगी FIR

 

नई दिल्ली: किसी व्यक्ति के गुमशुदा होने की सूचना मिलने पर पुलिस अब FIR दर्ज करने में देरी नहीं कर सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदगी के मामलों में पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी होगी और यह निर्देश हर व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे वह बच्चा हो या वयस्क, पुरुष हो या महिला।

कोर्ट ने अपने आदेश की व्याख्या करते हुए कहा कि पहले दिए गए निर्देश में इस्तेमाल किया गया “व्यक्ति” शब्द केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। इसका दायरा हर उम्र और हर लिंग के व्यक्ति तक है। यानी यदि कोई वयस्क भी लापता होता है और उसके संबंध में पुलिस को सूचना दी जाती है, तो पुलिस को मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल FIR दर्ज करनी होगी।

गुमशुदगी की सूचना पर कार्रवाई जरूरी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस केवल सामान्य गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करके मामले को लंबित नहीं रख सकती। मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत तत्काल कार्रवाई जरूरी है। इसका उद्देश्य लापता व्यक्ति की जल्द तलाश शुरू करना और उसके साथ किसी संभावित अपराध की आशंका होने पर समय रहते जांच करना है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुमशुदा व्यक्ति की उम्र या लिंग के आधार पर पुलिस की कार्रवाई में अंतर नहीं होना चाहिए। बच्चा, महिला, पुरुष या कोई अन्य वयस्क—हर मामले में पुलिस को सूचना मिलने के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी

कोर्ट ने अपने निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी स्पष्ट संदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश इन निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है।

इस निर्देश से गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की जवाबदेही और बढ़ गई है। अब किसी व्यक्ति के परिवार को FIR दर्ज कराने के लिए अनावश्यक देरी या परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।

परिवारों के लिए अहम फैसला

किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने पर उसके परिवार के लिए शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस कार्रवाई से तलाश और जांच की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। कोर्ट के इस निर्देश का उद्देश्य भी यही है कि गुमशुदगी की सूचना को गंभीरता से लिया जाए और पुलिस तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करे।

कोर्ट ने साफ कर दिया है कि “व्यक्ति” का अर्थ केवल बच्चा नहीं, बल्कि हर उम्र का गुमशुदा व्यक्ति है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस निर्देश का पालन करना होगा, वरना उन्हें न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।