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राहुल गांधी बोले-रील 21वीं सदी का नशा, कहा- मेहनत के बावजूद युवाओं को नहीं मिल रही पक्की नौकरी

 

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज की 21वीं सदी में रील युवाओं के लिए एक तरह का “नशा” बन गई है। राहुल गांधी ने युवाओं के सामने मौजूद रोजगार के संकट को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से सवाल किया।

राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा मेहनत और मजदूरी करने के लिए तैयार है, लेकिन उसे स्थायी रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हजार युवाओं में से केवल करीब 12 युवाओं को ही स्थायी नौकरी मिल पाती है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा अस्थायी काम, दिहाड़ी या अनिश्चित रोजगार पर निर्भर हैं।

कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर युवाओं के बढ़ते समय को भी रोजगार संकट से जोड़ते हुए कहा कि रील देखने और बनाने की आदत युवाओं का ध्यान वास्तविक समस्याओं से भटका रही है। उन्होंने इसे “21वीं सदी का नशा” बताते हुए युवाओं को रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर ध्यान देने की बात कही।

राहुल गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश की युवा आबादी के लिए पर्याप्त और सुरक्षित रोजगार पैदा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उनके इस बयान के बाद बेरोजगारी, स्थायी नौकरी और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा बताए गए रोजगार के आंकड़ों का पूरा संदर्भ और स्रोत स्पष्ट होना जरूरी है। सरकार की ओर से इस दावे पर प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।

देश में बड़ी युवा आबादी को देखते हुए रोजगार का मुद्दा लगातार राजनीतिक दलों के लिए अहम बना हुआ है। आगामी चुनावों के बीच बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।