झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी जेपीएससी (Jharkhand Public Service Commission) और जेएसएससी (Jharkhand Staff Selection Commission) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन में प्रमुखता से छाया रहा। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए। विपक्षी विधायकों ने परीक्षाओं को लेकर युवाओं और अभ्यर्थियों की चिंताओं को सदन में उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सदन में कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी की विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए तथा पूरे मामले की अदालत की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराई जाए। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों से लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित हुआ है, इसलिए पारदर्शी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष को पिछली सरकारों के दौरान आयोजित पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद भाजपा विधायक अपनी सीटों से उठकर विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित हुआ और सदन में सामान्य कार्यवाही नहीं हो सकी। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
इससे पहले मानसून सत्र के पहले दिन भी विपक्ष ने इसी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। भाजपा विधायक "न्याय चाहिए, धोखा नहीं" लिखे मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। इन मास्क पर जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल भर्ती परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग भी दर्ज थी। विपक्ष का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि राज्य के छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विधानसभा के भीतर और बाहर विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को न्याय दिलाना विपक्ष की प्राथमिकता है।
विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से 12 अगस्त तक प्रस्तावित है। हालांकि शनिवार और रविवार के अवकाश के कारण सदन की कार्यवाही केवल पांच कार्य दिवसों तक ही चलेगी। ऐसे में संभावना है कि आगामी बैठकों में भी जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षा का मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।