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यूपी विधानसभा में महाना भावुक, भाषा की मर्यादा रखने की अपील

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म रहा। एक ओर योगी सरकार द्वारा पेश किए गए *₹59,019 करोड़ के अनुपूरक बजट* पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर सदन की कार्यवाही के दौरान शालीनता और संसदीय परंपराओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।

विधानसभा अध्यक्ष *सतीश महाना* ने विपक्ष के व्यवहार और लगातार हो रहे हंगामे पर गहरी नाराजगी जताई। सदन को संबोधित करते हुए वह भावुक नजर आए और कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि क्या वह इस जिम्मेदारी के योग्य हैं या नहीं। उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गंभीर हो गया।

महाना ने सभी दलों के विधायकों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सदन की गरिमा, संसदीय परंपराओं और भाषा की मर्यादा का पालन हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा जनता की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां होने वाली हर गतिविधि पर प्रदेश की जनता की नजर रहती है।

इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई थी। समाजवादी पार्टी के विधायक *सचिन यादव* ने सदन के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लहराई थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का उल्लंघन माना। इस घटना के बाद अध्यक्ष ने सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।

सतीश महाना ने उस समय भी कहा था कि उन्हें उम्मीद थी कि सचिन यादव एक पढ़े-लिखे जनप्रतिनिधि होने के नाते बेहतर आचरण करेंगे, लेकिन उनका व्यवहार निराशाजनक रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का पालन सभी सदस्यों के लिए समान रूप से आवश्यक है।

बुधवार को सदन में सरकार के अनुपूरक बजट पर चर्चा के साथ-साथ विपक्ष ने विभिन्न जनहित के मुद्दों को भी उठाया। हालांकि, अध्यक्ष ने बार-बार सभी सदस्यों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।

विधानसभा अध्यक्ष की भावुक अपील को राजनीतिक गलियारों में गंभीर संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उनका उद्देश्य केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष सहित सभी विधायकों को सदन की गरिमा बनाए रखने की याद दिलाना था। अब देखना होगा कि आगामी दिनों में मानसून सत्र की कार्यवाही कितनी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ती है।