नई दिल्ली। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। लोकसभा से 31 जुलाई को मंजूरी मिलने के बाद राज्यसभा ने भी विधेयक को पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है, ताकि फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
संशोधन का सबसे अहम प्रावधान देर से होने वाले पंजीकरण (Delayed Registration) से जुड़ा है। नए नियम के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो अब इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class - JMFC) की अनुमति अनिवार्य होगी। इससे पहले ऐसे मामलों में विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति से पंजीकरण कराया जा सकता था।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से देर से होने वाले पंजीकरण की कानूनी जांच अधिक मजबूत होगी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की संभावनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही, जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड अधिक सटीक और विश्वसनीय बनेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं, पहचान संबंधी दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
क्या बदला?
- दो वर्ष से अधिक देरी से पंजीकरण पर JMFC की अनुमति अनिवार्य।
- फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों पर लगेगी रोक।
- पंजीकरण प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत।
- सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता में होगा सुधार।