फुकेट (थाईलैंड) से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI-2379 में उड़ान के दौरान अचानक आए तेज टर्बुलेंस के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विमान में सवार 10 यात्रियों और 4 क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं। हालांकि पायलटों की सतर्कता और अनुभव की बदौलत विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतार लिया गया। घटना के बाद सभी घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया और किसी के भी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
जानकारी के अनुसार एयरबस A320 विमान में कुल 134 यात्री सवार थे। उड़ान अपने निर्धारित मार्ग पर थी, तभी क्रूज चरण के दौरान विमान अचानक तेज वायु प्रवाह और अस्थिर मौसम की चपेट में आ गया। कुछ सेकंड के भीतर विमान को जोरदार झटके महसूस हुए और ऊंचाई में अचानक बदलाव आया। यात्रियों ने बताया कि विमान लगभग दो से तीन मिनट तक लगातार हिलता रहा, जिससे कई लोग अपनी सीटों से उछल गए। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी, उन्हें सबसे अधिक चोटें आईं।
विमान के सुरक्षित उतरने के तुरंत बाद एयरलाइन की मेडिकल टीम सक्रिय हुई। घायलों को एयरपोर्ट स्थित मेडिकल सेंटर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। एयरलाइन ने यह भी कहा कि घटना की जांच संबंधित विमानन अधिकारियों के सहयोग से की जाएगी।
क्या होता है टर्बुलेंस?
टर्बुलेंस वह स्थिति होती है जब विमान असमान या अनियमित वायु प्रवाह वाले क्षेत्र से गुजरता है। ऐसी स्थिति में विमान अचानक ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने लगता है। इसे सड़क पर चलते समय गाड़ी के गड्ढों या उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने जैसी स्थिति से समझा जा सकता है। आधुनिक विमान ऐसे झटकों को सहने के लिए डिजाइन किए जाते हैं और सामान्य परिस्थितियों में टर्बुलेंस विमान के ढांचे के लिए गंभीर खतरा नहीं होता। हालांकि यदि यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए हों तो उन्हें चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है।
टर्बुलेंस क्यों होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है। गरज वाले बादल, तेज हवाएं और खराब मौसम इसकी सबसे सामान्य वजह हैं। इसके अलावा गर्म और ठंडी हवा के मिलने से बनने वाला अस्थिर वायु प्रवाह भी विमान को प्रभावित करता है। पहाड़ी इलाकों के ऊपर हवा की दिशा और गति में अचानक बदलाव भी टर्बुलेंस पैदा कर सकता है। सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति "क्लियर एयर टर्बुलेंस" मानी जाती है, क्योंकि यह साफ आसमान में अचानक होता है और इसे मौसम रडार भी कई बार पहले से नहीं पकड़ पाता।
दुनिया में टर्बुलेंस की प्रमुख घटनाएं
हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें गंभीर टर्बुलेंस का सामना कर चुकी हैं। मई 2024 में लंदन से सिंगापुर जा रही सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान म्यांमार के ऊपर भीषण टर्बुलेंस में फंस गई थी। विमान कुछ ही सेकंड में हजारों फीट नीचे आ गया, जिसमें एक यात्री की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हुए।
मार्च 2024 में सिडनी से ऑकलैंड जा रही LATAM एयरलाइंस की उड़ान तकनीकी समस्या और टर्बुलेंस के कारण अचानक नीचे झुक गई थी। इस घटना में 50 से अधिक यात्री घायल हुए थे। दिसंबर 2023 में पर्थ से दुबई जा रही एमिरेट्स की उड़ान में हिंद महासागर के ऊपर टर्बुलेंस आने से 14 लोग घायल हो गए थे।
भारत में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। मई 2022 में मुंबई से दुर्गापुर जा रही स्पाइसजेट की उड़ान लैंडिंग से पहले भीषण टर्बुलेंस में फंस गई थी, जिसमें कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हुए थे। वहीं 2018 में अमृतसर से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की ड्रीमलाइनर उड़ान में भी तेज टर्बुलेंस के कारण विमान के अंदर सामान गिर गया था और कई यात्री घायल हो गए थे।
यात्रियों के लिए क्या हैं जरूरी सावधानियां?
विमानन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यात्रा के दौरान सीट पर बैठे रहने पर हमेशा सीट बेल्ट बांधकर रखें, भले ही सीट बेल्ट संकेत बंद हो। टर्बुलेंस कभी भी अचानक आ सकता है और यही छोटी-सी सावधानी गंभीर चोटों से बचा सकती है। साथ ही उड़ान के दौरान क्रू सदस्यों के सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना भी बेहद जरूरी है।