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यूपी मानसून सत्र शुरू, विपक्ष का जोरदार हंगामा और प्रदर्शन

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र सोमवार को राजनीतिक गर्माहट और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन विधानसभा परिसर के बाहर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा, नीट पेपर लीक, किसानों की समस्याओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।

समाजवादी पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता अलग-अलग तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे। कुछ नेता हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर विधानसभा पहुंचे, जिन पर सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। कई कार्यकर्ता दानपेटी में सिक्के भरकर विरोध जताते दिखाई दिए। वहीं सपा नेता ज़ाहिद बेग साइकिल पर विधानसभा पहुंचे और उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा तथा ई-20 पेट्रोल से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।

विधानसभा परिसर के बाहर लगाए गए पोस्टरों में सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगाए गए। विपक्ष का कहना था कि राज्य सरकार जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। कांग्रेस के विधायकों ने भी समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर प्रदर्शन किया और विभिन्न जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की बात कही।

दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने सभी विधायकों का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और सरकार हमेशा सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार ने संवाद और विकास के माध्यम से प्रदेश को नई दिशा देने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय गन्ना किसानों का भुगतान वर्षों तक लंबित रहता था और किसान परेशान रहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आज राम मंदिर का मुद्दा उठाने वाले वही लोग हैं, जिन पर अतीत में रामभक्तों के खिलाफ कार्रवाई करने के आरोप लगते रहे हैं।

मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहे। सरकार की ओर से संकेत दिए गए कि मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक और अध्यादेश सदन में पेश किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार सरकार पिछले सत्र के बाद नौ अध्यादेश जारी कर चुकी है। इन अध्यादेशों को कानून का रूप देने के लिए प्रतिस्थानी विधेयक इस सत्र में पेश किए जा सकते हैं। इसके अलावा सरकार कुछ नए विधेयक भी सदन के सामने रख सकती है, जिन पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

सत्र के पहले दिन विधानसभा में देश के सबसे उम्रदराज समाजवादी पार्टी विधायक आलमबदी के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा गया। सदन के सभी सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि विधान परिषद की कार्यवाही सोमवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रही।

चार दिनों तक चलने वाले इस मानसून सत्र में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, किसानों की समस्याएं, बिजली, स्वास्थ्य और विकास कार्यों सहित कई अहम मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। राजनीतिक दलों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की जाएगी।