Latest News Lifestyle
भाखड़ा-ब्यास बिजली विवाद पर SC ने पंजाब को दी कड़ी चेतावनी


 भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से जुड़े बिजली बकाया विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि पंजाब को न्यायालय के आदेशों का पालन न करने की आदत है और यदि इस बार भी आदेश का पालन नहीं किया गया तो राज्य को इसके परिणाम भुगतने होंगे।

यह मामला हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले बिजली के हिस्से से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में अपने फैसले में कहा था कि हिमाचल प्रदेश को 1 नवंबर 1966 से संयुक्त पंजाब राज्य की बिजली में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार है। अदालत ने उस समय राज्य के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन अब तक उसका पूरी तरह पालन नहीं हो पाया है।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि उन्होंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्रीय बिजली मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत की है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से पुराने रिकॉर्ड की जांच कराने के बाद एक ऐसा समझौता प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे सभी पक्षों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।

इस प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों के बीच सीधे पैसे का लेन-देन करने के बजाय बिजली के जरिए बकाया का समायोजन किया जाएगा। इससे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की कोशिश की गई है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा अगले 15 लीन सीजन (अक्टूबर से मार्च) के दौरान हर वर्ष हिमाचल प्रदेश को 871 मिलियन यूनिट (MU) बिजली देंगे। इस तरह कुल 13,066 MU बिजली बकाया के रूप में दी जाएगी। बिजली का वितरण भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं के निर्धारित अनुपात के अनुसार किया जाएगा।

इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की पूंजीगत लागत में हिस्सेदारी का भी आकलन किया गया है। यह राशि लगभग *420.7 करोड़ रुपये* तय की गई है, जिसमें पंजाब का हिस्सा *249.2 करोड़ रुपये* और हरियाणा का हिस्सा *171.5 करोड़ रुपये* है। इस राशि को भी बिजली बकाया के साथ समायोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

हिमाचल प्रदेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और हरियाणा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने अदालत में कहा कि वे अटॉर्नी जनरल के इस प्रस्ताव से सहमत हैं और विवाद का समाधान इसी आधार पर किया जा सकता है।

हालांकि पंजाब सरकार ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता ने कहा कि प्रस्ताव व्यवहारिक नहीं है और इससे पंजाब को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने अदालत से राज्य की चिंताओं पर विचार करने की मांग की।

पंजाब की आपत्ति पर सुप्रीम Court ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला करीब 60 साल पुराने विवाद से जुड़ा है और 15 साल पहले दिए गए फैसले को अब तक लागू नहीं किया गया है। अदालत ने कहा कि यदि समझौता नहीं होता है तो हिमाचल प्रदेश को 2011 से ब्याज सहित उसका पूरा लाभ दिया जाएगा और अदालत किसी भी स्थिति में आदेश का पालन सुनिश्चित करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को अपने रुख पर दोबारा विचार करने के लिए समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि समझौता नहीं हुआ तो वह अपने आदेश को सख्ती से लागू करेगी।