नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच संसद के मानसून सत्र में बदले राजनीतिक घटनाक्रम ने नई तस्वीर पेश की है। हाल के दिनों में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन संसद में विपक्षी एकजुटता के प्रदर्शन ने इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है।
दरअसल, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के एक बयान के बाद कांग्रेस और सपा के रिश्तों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। माना जा रहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की राहें अलग हो सकती हैं। हालांकि, संसद के मानसून सत्र में घटनाक्रम कुछ अलग ही देखने को मिला।
संसद के भीतर कई मुद्दों पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आए। विपक्षी रणनीति और सरकार के खिलाफ साझा तेवरों ने यह संकेत दिया कि दोनों दल फिलहाल अपने राजनीतिक तालमेल को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में दिखाई गई यह एकजुटता विपक्षी गठबंधन को मजबूती देने का संदेश है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दों पर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि लखनऊ में जिस गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही थी, उसे दिल्ली की सियासत ने नई ऊर्जा देने का प्रयास किया है। आने वाले महीनों में दोनों दलों की चुनावी रणनीति और साझा कार्यक्रम यह तय करेंगे कि यह दोस्ती 2027 के चुनाव तक कितनी मजबूत बनी रहती है।