नई दिल्ली। देश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के दावों के बीच सरकारी आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। UDISE+ (2025-26) के अनुसार, देशभर में 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक ही शिक्षक तैनात है। इन स्कूलों में एक ही शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य, रिकॉर्ड संधारण और अन्य जिम्मेदारियां भी निभा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश इस सूची में सबसे ऊपर है। राज्य में 16,357 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। यह देश के कुल एकल-शिक्षक स्कूलों का 16 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही शिक्षक के जिम्मे कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाना सीखने की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है। ऐसे स्कूलों में मल्टीग्रेड टीचिंग, सीमित व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ जैसी समस्याएं आम हैं।
टॉप 7 राज्य जहां सबसे ज्यादा एकल-शिक्षक स्कूल
- आंध्र प्रदेश – 16,357 स्कूल
- (UDISE+ रिपोर्ट के अनुसार दूसरे से सातवें स्थान पर आने वाले राज्य)
शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में बड़ी संख्या में एकल-शिक्षक स्कूलों का होना नीति निर्माताओं और शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
सरकार की ओर से समय-समय पर शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन UDISE+ के ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के कई हिस्सों में अभी भी शिक्षक उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।