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इंस्पायर अवार्ड योजना से छात्रों को जापान जाने का मौका


देशभर के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए इंस्पायर अवार्ड-मानक योजना एक बड़ा अवसर लेकर आई है। इस योजना के तहत छात्रों से ऐसे नए और उपयोगी वैज्ञानिक आइडिया मांगे गए हैं, जो समाज की किसी समस्या का समाधान प्रस्तुत कर सकें या विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नया योगदान दे सकें।

इस योजना का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से छात्र अपनी कल्पना और वैज्ञानिक समझ को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे मॉडल के रूप में विकसित कर सकेंगे।

विद्यालय स्तर पर चुने गए विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने के लिए 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इस आर्थिक सहायता का उपयोग छात्र अपने मॉडल को बेहतर तरीके से तैयार करने में कर सकेंगे।

इसके बाद तैयार किए गए मॉडल जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं और विज्ञान प्रदर्शनी में भेजे जाएंगे। हर स्तर पर विशेषज्ञ मॉडल का मूल्यांकन करेंगे और सबसे बेहतर नवाचारों का चयन किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को साकुरा साइंस कार्यक्रम* के तहत जापान जाने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों को जापान के वैज्ञानिक संस्थानों का भ्रमण कराया जाएगा। वे वहां के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से बातचीत कर सकेंगे तथा आधुनिक विज्ञान, नई तकनीकों और अनुसंधान के तरीकों को करीब से समझने का मौका मिलेगा।

योजना के तहत जापान की पूरी शैक्षणिक यात्रा का खर्च भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने का अवसर मिलेगा।

स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिक से अधिक छात्रों के वैज्ञानिक आइडिया ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करें। प्रत्येक विद्यालय से कम से कम *पांच नवाचारी आइडिया* भेजना अनिवार्य किया गया है। प्रधानाचार्यों और विज्ञान शिक्षकों से कहा गया है कि वे छात्रों को इस योजना के बारे में जानकारी दें और समय पर उनके आइडिया जमा कराने में मदद करें।

योजना के अनुसार छात्रों के आइडिया 15 सितंबर तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इसके बाद चयन प्रक्रिया शुरू होगी और योग्य छात्रों को अगले चरणों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल पुरस्कार जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नई सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का एक बड़ा मंच है। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को भी अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का अवसर मिलेगा।

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