नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की चर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में किसी भी चयनित शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी। सरकार के इस रुख से लंबे समय से असमंजस की स्थिति में रहे हजारों शिक्षकों और अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, वर्ष 2020 में 67,867 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के बजाय केवल 3.86 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) को 21 प्रतिशत के स्थान पर 16.6 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया। इसी आधार पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई।
मामले में करीब 9,000 अभ्यर्थियों ने स्वयं को पात्र बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। वहीं, प्रभावित अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर लगातार आंदोलन और प्रदर्शन भी करते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि वर्तमान में कार्यरत किसी भी शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रयागराज हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तैयार की गई संशोधित (रिवाइज्ड) मेरिट सूची में नए अभ्यर्थी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी।
सरकार के इस रुख को भर्ती विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सरकार के हलफनामे से चयनित शिक्षकों और नए अभ्यर्थियों—दोनों के लिए राहत और उम्मीद की स्थिति बनी है।