मुंबई। सोनी सब पर प्रसारित होने वाला लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ आज अपने प्रसारण के 18 वर्ष पूरे कर चुका है. 28 जुलाई 2008 को शुरू हुआ यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के सबसे लंबे समय तक चलने वाले और सबसे लोकप्रिय पारिवारिक कॉमेडी कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से यह शो करोड़ों दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर रहा है और अपनी साफ-सुथरी पारिवारिक मनोरंजन शैली के कारण हर आयु वर्ग की पहली पसंद बना हुआ है।
यह धारावाहिक प्रसिद्ध गुजराती लेखक तारक मेहता के व्यंग्य स्तंभ दुनिया ने ऊंधा चश्मा से प्रेरित है। निर्माता असित कुमार मोदी ने इसे ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जहां हास्य के साथ सामाजिक मुद्दों, आपसी भाईचारे, स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सम्मान और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों को भी सरल अंदाज में दर्शकों तक पहुंचाया गया।
शो की कहानी गोकुलधाम सोसाइटी के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों से जुड़े परिवार एक साथ रहते हैं। जेठालाल गड़ा, दया गड़ा, तारक मेहता, आत्माराम भिड़े, माधवी भिड़े, रोशन सिंह सोढ़ी, बबीता अय्यर, कृष्णन अय्यर, पोपटलाल, चंपकलाल गड़ा, बाघा, नट्टू काका, अब्दुल और टप्पू सेना जैसे किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं। इन पात्रों ने वर्षों तक अपनी अनूठी कॉमिक टाइमिंग और भावनात्मक कहानियों से लोगों का मनोरंजन किया है।
हालांकि समय के साथ कई कलाकारों ने शो को अलविदा कहा और कुछ प्रमुख किरदारों के चेहरे बदले, फिर भी कार्यक्रम की लोकप्रियता में बड़ी कमी नहीं आई। नए कलाकारों और नई कहानियों के साथ यह शो लगातार आगे बढ़ता रहा और आज भी टीवी जगत में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। हाल के वर्षों में भी इसकी दर्शक संख्या और लोकप्रियता उल्लेखनीय बनी हुई है।
18 वर्षों के इस ऐतिहासिक सफर ने साबित कर दिया है कि साफ-सुथरा हास्य, पारिवारिक मूल्य और सकारात्मक संदेश कभी पुराने नहीं होते। यही वजह है कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ केवल एक टीवी शो नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
28 जुलाई 2008 को शुरू हुआ शो आज भी टीआरपी और दर्शकों के दिलों पर कायम, गोकुलधाम परिवार बना हर घर की पहचान