नई दिल्ली: देश की परीक्षा प्रणाली पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2002 से 2025 के बीच देश में 45 बड़े परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आए, जिनमें प्रत्येक परीक्षा में एक लाख या उससे अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इसके बावजूद अब तक केवल 2 मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी है।
जांच के अनुसार, इन 45 मामलों में 27 परीक्षाएं सरकारी नौकरियों की भर्ती से जुड़ी थीं, जबकि 18 मामले कॉलेजों, विश्वविद्यालयों के प्रवेश परीक्षा और स्कूल बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित थे। इससे स्पष्ट होता है कि पेपर लीक की समस्या केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लगभग हर स्तर को प्रभावित करती रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, इन मामलों में अब तक 1,658 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 925 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति के कारण अधिकांश मामलों का अंतिम फैसला अभी तक नहीं हो पाया है।
जांच में यह भी सामने आया कि 2 मामलों में 32 आरोपी बरी हो गए, जबकि 43 आरोपी अभी भी विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जेल में हैं। वहीं, केवल 2 मामलों में 18 लोगों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई, जो पूरे आंकड़े की तुलना में बेहद कम है।
इन तथ्यों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ समयबद्ध जांच और त्वरित सजा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना चुनौती बना रहेगा।
(स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन)