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बैठक के बाद छात्रों के समर्थन में विपक्ष का मार्च


*नई दिल्ली।* राष्ट्रीय राजधानी में NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर INDI गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के कई विपक्षी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा परीक्षा प्रणाली, कथित पेपर लीक मामलों और हालिया छात्र आंदोलनों से जुड़े विषयों पर साझा रणनीति तैयार करना बताया गया।

बैठक समाप्त होने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि INDI गठबंधन के सांसद और नेता शांतिपूर्ण ढंग से गांधी स्मृति (30 जनवरी मार्ग) जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यह यात्रा उन छात्रों की स्मृति में है जिनकी मौतों का मुद्दा विपक्ष उठा रहा है, साथ ही उन छात्रों के समर्थन में भी है जो हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अकेले नहीं हैं और पूरा विपक्ष उनकी आवाज़ के साथ खड़ा है।

बैठक के बाद विपक्षी नेताओं का एक समूह बसों के माध्यम से गांधी स्मृति के लिए रवाना हुआ। इस दौरान कई सांसदों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग दोहराई।

दूसरी ओर केंद्र सरकार ने भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार संसद के भीतर NEET-UG पेपर लीक सहित शिक्षा से जुड़े सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा करने के लिए तैयार है और विपक्ष जितनी देर चाहे उतनी देर तक बहस हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि सरकार ने पिछले 24 घंटों में प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए कई प्रस्ताव दिए हैं। उनके अनुसार सरकार आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर खुले मन से बातचीत करना चाहती है और प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास अथवा कार्यालय में बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है।

हालांकि प्रदर्शनकारी संगठन CJP ने सरकार के प्रस्ताव पर अलग रुख अपनाया। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बातचीत किसी तटस्थ स्थान या जंतर-मंतर पर होनी चाहिए ताकि प्रक्रिया सभी पक्षों के लिए निष्पक्ष दिखाई दे।

इस बीच संसद के मानसून सत्र में भी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस विषय पर व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता आने वाले समय में भी राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच संसद के भीतर होने वाली चर्चा तथा प्रदर्शनकारियों के साथ संभावित वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।