चार्जिंग स्टेशन बढ़ेंगे, तो भरोसा भी बढ़े: यूपी में 1000 नए EV स्टेशन लगाने की तैयारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही प्रदेश में करीब 1,000 नए EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक मुखिया आशीष गोयल ने इस दिशा में जानकारी दी है। सरकार के इस कदम को प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
हालांकि, नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के साथ-साथ पहले से मौजूद स्टेशनों की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता पर भी ध्यान देना जरूरी है। EV इस्तेमाल करने वाले लोगों के मुताबिक, कई चार्जिंग स्टेशनों पर लो-वोल्टेज, तकनीकी खराबी और चार्जर बंद होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
सामान्य परिस्थितियों में जिस वाहन को करीब 40 मिनट में चार्ज होना चाहिए, उसे कई बार डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। कुछ जगहों पर चार्जर अचानक बंद हो जाते हैं, जबकि तकनीकी खराबी आने के बाद उन्हें ठीक होने में कई दिन लग जाते हैं।
ऑनलाइन ‘Available’, लेकिन मौके पर चार्जर बंद
EV चालकों के सामने एक और बड़ी चुनौती चार्जिंग स्टेशन की सही और रियल-टाइम जानकारी की है। कई बार मोबाइल ऐप या मैप पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध दिखाई देता है, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद पता चलता है कि स्टेशन बंद है या चार्जर काम नहीं कर रहा।
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले EV मालिकों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। अगर रास्ते में चार्जिंग स्टेशन काम नहीं करता, तो अगले चार्जिंग पॉइंट तक पहुंचना भी चुनौती बन सकता है और पूरी यात्रा का प्लान प्रभावित हो सकता है।
सिर्फ संख्या नहीं, भरोसेमंद नेटवर्क जरूरी
विशेषज्ञों और EV उपयोगकर्ताओं का मानना है कि प्रदेश में नए चार्जिंग स्टेशन लगाने के साथ मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए स्थिर बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज की समस्या का समाधान, खराब चार्जरों की समयबद्ध मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा चार्जिंग स्टेशनों की 24×7 मॉनिटरिंग, ऐप और मैप पर उनकी वास्तविक समय की स्थिति अपडेट करने तथा प्रमुख हाईवे और शहरों में पर्याप्त संख्या में फास्ट चार्जर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
EV का भविष्य विश्वसनीय चार्जिंग नेटवर्क पर निर्भर
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का मतलब केवल EV की बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि उसके लिए एक मजबूत और भरोसेमंद इकोसिस्टम तैयार करना भी है। सरकार अगर लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर लाना चाहती है, तो उन्हें यह भरोसा भी देना होगा कि यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होगा और सही तरीके से काम करेगा।< एक हजार नए चार्जिंग स्टेशन लगाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि ये स्टेशन कितने विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से काम करते हैं। EV का भविष्य सिर्फ चार्जिंग स्टेशनों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी विश्वसनीयता से तय होगा।