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अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान का पलटवार, खाड़ी में अमेरिकी जहाजों और टैंकरों पर हमले से बढ़ा तनाव


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब समुद्री क्षेत्र और खाड़ी के आसपास और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की थी। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी युद्धपोत इन हमलों से बच निकले और किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की सूचना नहीं है। ([Central Command][2])

इसके बाद ईरान की ओर से खाड़ी में अमेरिकी और अमेरिकी सहयोगी जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं। बाद की रिपोर्टों में ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमले की भी पुष्टि हुई है। 

 अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का जवाब

अमेरिका ने हालिया कार्रवाई में तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। अमेरिकी सेना के अनुसार इन जहाजों का संबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और क्षेत्र में उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क से था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक दो ईरानी तेल वाहकों को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि एक खाली टैंकर को भी इस तरह क्षतिग्रस्त किया गया कि वह काम करने की स्थिति में नहीं रहा। कार्रवाई से पहले जहाजों के चालक दल को उन्हें छोड़ने का निर्देश दिए जाने की बात भी अमेरिकी सेना ने कही है। ([Central Command][2])

ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक कदम बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कथित तौर पर ऐसे तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिन्हें वह निर्धारित या अधिकृत मार्ग से हटकर चलते हुए मानती थी। ([Al Jazeera][3])

 होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा तनाव केंद्र

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

ईरान लंबे समय से इस जलमार्ग पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता रहा है। हालिया तनाव के बीच ईरान ने जहाजों के आवागमन को लेकर अपनी शर्तों और निर्धारित मार्गों की बात कही है। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग खुला रहना चाहिए और वह खाड़ी में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा।

हालिया आंकड़ों के मुताबिक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ रहा है। 

 जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी मिसाइल हमला

समुद्री क्षेत्र में तनाव के साथ ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया। ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर है।

जॉर्डन ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 20 में से 18 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, जबकि बाकी मिसाइलें खुले इलाकों में गिरीं। इस हमले में किसी बड़े हताहत की तत्काल सूचना नहीं दी गई। ([Reuters][1])

यह घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष अब केवल समुद्री सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

 ईरान ने पहले ही दी थी चेतावनी

ईरान की ओर से हाल के दिनों में अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत दिए गए थे। ईरान ने अपनी नई बैलिस्टिक मिसाइल 'कासिम बसीर' को भी अपनी बढ़ती सैन्य क्षमता के उदाहरण के तौर पर पेश किया है।

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े अधिकारी मोहसिन रेजाई ने दावा किया था कि इस मिसाइल का परीक्षण अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ किया गया। हालांकि इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि परीक्षण में वास्तव में यही हथियार इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

ईरानी अधिकारियों ने इस मिसाइल की रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर होने और इसकी सटीकता में सुधार का दावा किया है। ([AP News][5])

 अमेरिका ने होर्मुज में 'एक्सक्लूजन जोन' के दावे को खारिज किया

ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तरह के प्रतिबंधित या निर्धारित समुद्री क्षेत्र की बात सामने आने के बाद अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया। वॉशिंगटन का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग खुला रहना चाहिए।

अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की कार्रवाई की है। इस अभियान का उद्देश्य व्यावसायिक जहाजों के लिए समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाना बताया गया है। 

 दुनिया भर में शिपिंग पर बढ़ा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रहे हमलों का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर दिखाई देने लगा है। जहाजों के संचालक सुरक्षा जोखिम को देखते हुए वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं और कई जहाजों की आवाजाही में कमी आई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ऐसे में यहां लंबे समय तक तनाव बने रहने पर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालिया रिपोर्टों में होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या सामान्य औसत से कम बताई गई है। इस स्थिति ने तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ([Reuters][4])

 आमने-सामने खड़े अमेरिका और ईरान

अमेरिका का कहना है कि वह अपने सैन्य बलों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है। दूसरी ओर ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव और समुद्री नाकाबंदी का विरोध करते हुए जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ता यह टकराव अब केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। तेल निर्यात, समुद्री व्यापार, प्रतिबंध, बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दे भी संघर्ष का हिस्सा बन गए हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी हमले लगातार बढ़ते रहे तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।