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ठेके से 50 रुपये सस्ती, शाम होते ही ढाबे पर लगता था मेला सागर में जहरीली शराब से हुई 11 मौतों पर बड़ा खुलासा

 

सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 11 मौतों के बाद अवैध शराब के कारोबार को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट में बंडा इलाके में एक कथित अवैध ढाबे का पता चला है, जहां ग्रामीणों के मुताबिक लाइसेंसी शराब ठेके के मुकाबले 40 से 50 रुपये तक सस्ती शराब बेची जाती थी। 

ग्रामीणों का दावा है कि इस ढाबे पर 200 रुपये में चार पव्वे तक बेचे जाते थे। सस्ती शराब मिलने के कारण शाम होते ही यहां आसपास के गांवों से मजदूरों और ग्रामीणों की भीड़ जुटती थी। रिपोर्ट के मुताबिक ढाबे के आसपास शराब की खाली बोतलें और पानी के पाउच मिले, जबकि पीछे बड़ी संख्या में खाली बोतलों को जलाने के निशान भी दिखाई दिए। 

ढाबे पर खुलेआम चलता था शराब का कारोबार?

जांच में सामने आया कि कथित ढाबा भी अवैध तरीके से बनाया गया था। वहां बैठने के लिए कुछ टेबल और पानी का इंतजाम था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यहां शराब की सप्लाई कहां से होती थी और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। 

रिपोर्ट में जली हुई बोतलों के बीच ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड की बोतल मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस पहले ही इस ब्रांड की शराब को लेकर जांच कर रही है।

शराब में मिला था जानलेवा मेथेनॉल

सागर शराब कांड में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि मृतकों के पोस्टमार्टम में शरीर में बड़ी मात्रा में मेथेनॉल पाए जाने की बात सामने आई है। मेथेनॉल बेहद जहरीला रसायन है और इसका सेवन जानलेवा हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के मुताबिक मिलावटखोर कम लागत में शराब तैयार कर अधिक मुनाफा कमाने के लिए मेथेनॉल का इस्तेमाल कर रहे थे। 

11 लोगों की मौत, कई अस्पताल में

जहरीली शराब कांड में अब तक 11 मौतों की जानकारी सामने आई है। कई लोग अस्पतालों में भर्ती हैं और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने मामले में संदिग्धों को हिरासत में लेकर शराब की सप्लाई चेन और कथित मिलावट के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि जहरीली शराब आखिर कहां तैयार हुई, इसे किन लोगों ने सप्लाई किया और बंडा के कथित अवैध ढाबे तक इसकी पहुंच कैसे हुई। इस घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और उसके खिलाफ निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।