नाबालिग से जुड़ी शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज की नई FIR, पीछा करने, धमकी और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप भी शामिल
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुई मारपीट के मामले से चर्चा में आए स्वतंत्र भारद्वाज की कानूनी मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दिल्ली पुलिस ने नाबालिग से जुड़ी शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ POCSO Act, BNS और IT Act की धाराओं में नई FIR दर्ज की है। FIR में नाबालिग से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकी देने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, पुलिस के मुताबिक नई FIR में लगाई गई धाराएं जमानती हैं। ऐसे में सिर्फ FIR दर्ज होने के आधार पर तत्काल गिरफ्तारी कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होती। मामले में पुलिस जांच जारी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
स्वतंत्र भारद्वाज पहले जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप को लेकर चर्चा में आए थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट की गई थी।
इस मामले को लेकर शिकायत और पुलिस कार्रवाई की मांग के बाद विवाद बढ़ता गया। बाद में दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से भारद्वाज को हिरासत में लिया और उन्हें दिल्ली लाया गया। अदालत में पेशी के बाद उन्हें एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया।
नाबालिग से जुड़ी शिकायत के बाद नई FIR
जंतर-मंतर मामले के बीच नाबालिग से जुड़ी एक अलग शिकायत भी पुलिस के सामने पहुंची। इसके बाद संसद मार्ग थाने में नई FIR दर्ज की गई।
पुलिस की FIR में POCSO Act के साथ BNS और IT Act की धाराएं भी लगाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में कथित तौर पर नाबालिग का पीछा करने, धमकी देने और आपत्तिजनक व्यवहार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
POCSO एक्ट क्या है?
POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला विशेष कानून है। नाबालिग से संबंधित यौन अपराधों के मामलों में इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
हालांकि किसी FIR में POCSO की धारा लगना आरोप की जांच शुरू होने को दर्शाता है। अंतिम दोष या निर्दोषता अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर तय होती है।
जमानत को लेकर क्या स्थिति है?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नई FIR में लगाई गई धाराओं को रिपोर्ट के अनुसार जमानती बताया गया है। इसलिए FIR दर्ज होने के बावजूद तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं थी। इसी वजह से मामले में FIR और गिरफ्तारी को एक ही बात नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर कथित मारपीट के मामले में भारद्वाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा था। यानी दोनों घटनाक्रमों की कानूनी स्थिति अलग-अलग है।
मामले में आगे क्या होगा?
अब पुलिस नई FIR में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। शिकायत से जुड़े साक्ष्य, डिजिटल सामग्री और अन्य तथ्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
इस पूरे मामले ने जंतर-मंतर पर हुई घटना और नाबालिग से जुड़ी शिकायत को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस भी तेज कर दी है। वहीं, भारद्वाज से जुड़े समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
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स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ नाबालिग से जुड़ी शिकायत पर नई FIR दर्ज हुई।
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FIR में POCSO, BNS और IT Act की धाराएं लगाई गई हैं।
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जंतर-मंतर मारपीट मामले में उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
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अदालत ने उस मामले में एक दिन की पुलिस कस्टडी दी।
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नई POCSO FIR में लगी धाराएं रिपोर्ट के अनुसार जमानती हैं।
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मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में होगी।
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FIR में लगी 5 धाराएं और उनका मतलब
- धारा 78 BNS – पीछा करना: किसी महिला का पीछा करने या उसकी गतिविधियों पर नजर रखने से जुड़े आरोपों में यह धारा लगती है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 3 साल तक की सजा हो सकती है और यह जमानती है।
- धारा 79 BNS – महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना: किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य से जुड़े मामले में यह धारा लगती है। इसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है और यह जमानती धारा है।
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महत्वपूर्ण: FIR में धाराएं लगना आरोपों की जांच की शुरुआत है। आरोप साबित होना या न होना अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।
- धारा 351 BNS – आपराधिक धमकी: किसी व्यक्ति को धमकाने या डराने से जुड़े आरोपों में यह धारा लगाई जाती है। इसमें 2 साल तक की सजा हो सकती है और यह जमानती है।
- धारा 12 POCSO Act – यौन उत्पीड़न: नाबालिग से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों में यह धारा लगाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार इसमें 3 साल तक की सजा हो सकती है और यह जमानती है।
- धारा 67 IT Act – ऑनलाइन अश्लील सामग्री: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से जुड़े आरोपों में यह धारा लगती है। इसमें 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।