नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए भारत की तेज विकास यात्रा और देश के युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश की क्षमता लगातार दुनिया के सामने साबित हो रही है।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश में कोई बड़ा विकास कार्य होता है तो कुछ लोग हर उपलब्धि पर आपत्ति जताने लगते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने विपक्ष की तुलना 'नाराज फूफा' से की।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी उपलब्धियों के जरिए आलोचना करने वालों को जवाब दिया है। उन्होंने देश में बड़े प्रोजेक्ट्स, तकनीक, सेमीकंडक्टर और अन्य क्षेत्रों में हो रही प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
'नाराज फूफा' की तरह हर विकास पर आपत्ति
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जब भी कोई बड़ा काम होता है, कुछ लोगों को उसमें भी कमी नजर आती है। उन्होंने ऐसे लोगों के रवैये की तुलना परिवार के उस 'नाराज फूफा' से की, जिसे हर चीज में शिकायत नजर आती है।
उन्होंने कहा कि भारत अब बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की क्षमता रखता है। देश ने बड़े निर्माण कार्यों से लेकर आधुनिक तकनीक तक कई क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री ने देश की सबसे ऊंची मूर्ति से लेकर छोटी चिप के निर्माण तक का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है। उनके मुताबिक, देश की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
'दिमागी नक्सल' को लेकर भी PM मोदी का कटाक्ष
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने इसकी 'होम्योपैथिक गोली' दी थी।
पीएम मोदी ने कहा कि होम्योपैथिक दवा के संदर्भ में शुरुआत में बीमारी बढ़ती हुई दिखाई देती है और बाद में उसका इलाज होता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से 'दिमागी नक्सल' वाली बात कहे जाने के बाद कई लोग सामने आ गए।
प्रधानमंत्री के इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद युवाओं की ओर से उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया देखने को मिली। उन्होंने अपने संबोधन के जरिए राजनीतिक विरोध के साथ-साथ उन विचारों पर भी निशाना साधने की कोशिश की, जिन्हें वह देश के विकास में बाधा मानते हैं। भारत की तकनीकी क्षमता पर दिया जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अब तकनीक और आधुनिक उद्योगों के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। उन्होंने सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को केवल दुनिया की कंपनियों में काम करने वाले लोगों का देश नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारतीय कंपनियां भी वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करें।
उन्होंने कहा कि आज कई भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब भारतीय दुनिया की बड़ी कंपनियों को नेतृत्व दे सकते हैं, तो भारतीयों द्वारा बनाई गई कंपनियां दुनिया का नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपनी क्षमता पर भरोसा करने और नए अवसरों को तलाशने की अपील की।
'युवा भारत ग्लोबल लीडर बनने की दिशा में'
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं के पास ज्ञान और नेटवर्क दोनों हैं। उन्होंने युवाओं से इन दोनों ताकतों का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी है और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री ने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला वर्ग नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने और वैश्विक स्तर पर भारतीय कंपनियों को स्थापित करने वाली पीढ़ी के रूप में आगे आने का संदेश दिया।
उनके मुताबिक, भारत की नई पीढ़ी में दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है और जरूरत केवल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की है।
SRCC के लोगो से विकसित भारत का संदेश
प्रधानमंत्री ने कॉलेज के लोगो का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोगो में उगता हुआ सूरज और आगे बढ़ता हुआ जहाज दिखाई देता है। उनके अनुसार, यह प्रतीक आगे बढ़ने, नई संभावनाओं और निरंतर प्रगति की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज की यह भावना केवल संस्थान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश के युवाओं के जीवन और सोच में भी दिखाई देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं है। इसमें देश के हर नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की भूमिका अहम है।
'सपना हमारा है तो संकल्प भी हमारा होना चाहिए'
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सपना देश का है तो उसे पूरा करने का संकल्प भी देशवासियों का ही होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पीएम मोदी ने कहा कि तेज हवाओं का सामना करने का जज्बा रखने वाली युवा पीढ़ी ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
प्रधानमंत्री का संदेश था कि विकसित भारत की दिशा में उठाया गया हर कदम केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रगति का हिस्सा होना चाहिए।