Latest News Lifestyle
भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड की नई कार्यसमिति घोषित, 21 नए चेहरों को मौका

भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड की नई कार्यसमिति घोषित, 21 नए चेहरों को मौका

38 सदस्यीय टीम में OBC के 14, ब्राह्मण के 10 और SC के 5 नेताओं को प्रतिनिधित्व; नए चेहरों से साधा सामाजिक संतुलन

कानपुर: भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की नई क्षेत्रीय कार्यसमिति की घोषणा गुरुवार शाम कर दी। 38 सदस्यीय कार्यसमिति में 21 नए चेहरों को जगह दी गई है। नई टीम में OBC के 14, ब्राह्मण समाज के 10, क्षत्रिय के चार, वैश्य और कायस्थ के एक-एक, अल्पसंख्यक वर्ग के दो, अनुसूचित जाति (SC) के पांच और अनुसूचित जनजाति के एक नेता को प्रतिनिधित्व मिला है।

क्षेत्रीय अध्यक्ष और क्षेत्रीय प्रभारी भी OBC वर्ग से हैं। इस तरह पार्टी ने नई कार्यसमिति के गठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ संगठन में नए चेहरों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

उपाध्यक्ष पद पर कई नए चेहरे

क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पद पर नरेंद्र राजपूत, भुवन प्रकाश गुप्ता, नीतू सिंह, अखिलेश नाथ दीक्षित, आशीष कोल, अर्चना त्रिपाठी, अमित समाधिया और अरविंद मुखिया को जिम्मेदारी दी गई है। इनके अलावा अशोक राजपूत और पवन प्रताप सिंह को भी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

अशोक राजपूत पिछली कार्यसमिति में भी क्षेत्रीय उपाध्यक्ष थे, जबकि पवन प्रताप सिंह क्षेत्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पार्टी ने अनुभवी नेताओं को भी नई टीम में बनाए रखा है।

महामंत्री पद पर तीन नाम

क्षेत्रीय महामंत्री पद पर आदित्य त्रिवेदी, शिव सिंह भारती और राजेश पटेल को जिम्मेदारी मिली है। आदित्य त्रिवेदी को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के करीबी नेताओं में माना जाता है। वहीं शिव सिंह भारती और राजेश पटेल नई कार्यसमिति में प्रमुख जिम्मेदारी संभालेंगे।

SC समेत सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व

नई कार्यसमिति में SC वर्ग के पांच नेताओं को स्थान मिलना भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा ST और अल्पसंख्यक वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी की नई टीम में अलग-अलग सामाजिक समूहों की भागीदारी के जरिए क्षेत्र में संगठन को और मजबूत करने की कोशिश दिखाई दे रही है।

21 नए चेहरों पर बड़ी जिम्मेदारी

कुल 38 सदस्यों में 21 नए चेहरों को शामिल किए जाने से संगठन में बदलाव के संकेत मिले हैं। वहीं पुराने नेताओं को महत्वपूर्ण पद देकर उनके अनुभव का भी इस्तेमाल किया गया है। नई कार्यसमिति के सामने क्षेत्र में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की चुनौती होगी।