लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 328 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस को करीब 75 सीटें देने पर विचार चल रहा है।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति किस फॉर्मूले पर बनेगी, यह अभी साफ नहीं है।
कांग्रेस को 75 सीटें, लेकिन कई सीटों पर हो सकता है अलग फॉर्मूला
सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को 75 सीटें देने पर विचार जरूर चल रहा है, लेकिन इन सीटों पर भी उम्मीदवारों को लेकर अलग रणनीति अपनाई जा सकती है। कुछ सीटों पर सिंबल कांग्रेस का और उम्मीदवार सपा का होने की संभावना भी जताई जा रही है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले भी संकेत दे चुके हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा जीत की संभावना को महत्व दिया जाएगा। मई 2026 में उन्होंने कहा था कि गठबंधन जीत के आधार पर होगा, केवल सीटों की संख्या के आधार पर नहीं।
200 बनाम 75 सीटों पर फंसा पेंच
कांग्रेस अगर 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग करती है और सपा करीब 75 सीटों तक सीमित रखने की तैयारी में है, तो दोनों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। ऐसे में दोनों दलों के बीच बीच का रास्ता क्या होगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट फार्मूला सामने नहीं आया है।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में सपा ने 62 और कांग्रेस ने 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटों पर जीत हासिल की थी।
चुनाव से पहले गठबंधन की परीक्षा
2027 के विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन किस रूप में सामने आता है, इस पर यूपी की सियासत की नजर है। अखिलेश यादव हाल में 2027 के चुनाव को मुख्य रूप से सपा और भाजपा के बीच मुकाबला बताते हुए विपक्षी रणनीति के संकेत दे चुके हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस की 200 सीटों की दावेदारी और सपा के 75 सीटों के प्रस्ताव के बीच गठबंधन का अंतिम फॉर्मूला क्या होगा? दोनों दल इस मुद्दे पर अभी खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
दैनिक भास्कर के अनुसार इस खबर के लिहाज से प्रमुख सीटों में लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, रायबरेली, अमेठी, कानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और गाजीपुर जैसी सीटें चर्चा में रह सकती हैं। खासकर अयोध्या और वाराणसी का राजनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है।
राजनीतिक संकेतों के आधार पर संभावित सीटों की सूची मानना चाहिए। सपा का फोकस संख्या से ज्यादा “जिताऊ उम्मीदवार” पर बताया जा रहा है।