गौतमबुद्धनगर के छिजारसी गांव में बिजली कनेक्शनों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। दावा है कि यहां करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कई घरों के बाहर मीटर भी लगे हुए हैं।
आरोप है कि इन कनेक्शनों के जरिए हर महीने करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही है। सवाल यह है कि अगर ये कनेक्शन अवैध हैं, तो इनके घरों के बाहर मीटर कैसे लगे और इतने बड़े स्तर पर बिजली की सप्लाई कैसे जारी रही?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वसूली गई रकम सरकारी खजाने में जमा होने के बजाय एक कथित सिंडिकेट तक पहुंच रही है। यानी बिजली के नाम पर चल रहा यह पूरा नेटवर्क सरकारी व्यवस्था के समानांतर एक निजी वसूली तंत्र की तरह काम करने का आरोप झेल रहा है।
मामले ने बिजली विभाग की निगरानी और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 13 हजार कनेक्शन इतने लंबे समय तक कैसे चलते रहे? क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर पूरे मामले में किसी की मिलीभगत थी?
अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, अवैध कनेक्शनों की वास्तविक संख्या सामने लाई जाए और यह पता लगाया जाए कि हर महीने होने वाली कथित करोड़ों रुपये की वसूली आखिर किन लोगों तक पहुंच रही थी।