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चवन्नी विवाद में मायावती की एंट्री, सपा पर बरसीं बसपा सुप्रीमो

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच चल रहा ‘चवन्नी से रुपया’ विवाद अब और गरमा गया है। इस विवाद में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की भी एंट्री हो गई है। मायावती ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान को लेकर तीखा हमला बोला और उनसे न सिर्फ राष्ट्रीय लोकदल तथा उसके नेता जयंत चौधरी से, बल्कि पूरे जाट समाज से माफी मांगने की अपील की।

मायावती ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा कि सपा प्रमुख का अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता के बारे में यह कहना कि ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया’ पूरी तरह अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक है। उनके मुताबिक इस तरह की टिप्पणी राजनीतिक सहयोगियों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादा पर सवाल खड़े करती है।

 मायावती ने अखिलेश से माफी की मांग की

मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए आरएलडी और जयंत चौधरी से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इसे चौधरी चरण सिंह के परिवार से जोड़ते हुए पूरे जाट समाज से माफी मांगने की बात कही। जयंत चौधरी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह के बेटे हैं।

मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक और चुनावी समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में जाट समाज को लेकर सामने आया यह विवाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘काम निकलने के बाद रंग बदलती है सपा’

मायावती ने अपने बयान को केवल ‘चवन्नी’ टिप्पणी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सपा पर पुराने गठबंधन सहयोगियों के साथ राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी गठबंधन में जरूरत के समय सहयोगियों का इस्तेमाल करती है और काम निकलने के बाद उसका रुख बदल जाता है।

मायावती इससे पहले भी समाजवादी पार्टी की राजनीति को लेकर तीखे बयान देती रही हैं। अगस्त की शुरुआत में उन्होंने सपा को ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली’ पार्टी बताते हुए जनता से उसकी राजनीति से सावधान रहने की अपील की थी। उन्होंने सपा पर संकीर्ण और जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया था।

 सपा-रालोद के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने गठबंधन की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा था, ‘हम लोगों ने चवन्नी को रुपैया बना दिया, फिर भी छोड़ के चले गए।’ राष्ट्रीय लोकदल ने इस टिप्पणी को अपने अध्यक्ष जयंत चौधरी पर तंज के तौर पर लिया।

इसके बाद जयंत चौधरी ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने इस अहंकार को करीब से देखा है और ऐसा आचरण सिर्फ पतन की ओर ले जाता है।

इस विवाद के बीच सपा की ओर से भी सफाई सामने आई। वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के बयान का बचाव करते हुए कहा कि इसका गलत अर्थ निकाला गया और जानबूझकर किसी का अपमान करने की कोशिश नहीं थी।

 मायावती के बयान के सियासी मायने

मायावती के इस हमले को केवल दो दलों के बीच चल रही जुबानी जंग के रूप में नहीं देखा जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है और जयंत चौधरी की आरएलडी की इसी क्षेत्र में मजबूत पहचान रही है। ऐसे में मायावती का जयंत चौधरी के समर्थन में खुलकर आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में गठबंधन और सामाजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसी कारण सपा, आरएलडी, बसपा और भाजपा की बयानबाजी को चुनावी रणनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

फिलहाल ‘चवन्नी’ विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव के बयान पर जयंत चौधरी की प्रतिक्रिया और अब मायावती के हमले ने इस विवाद को और बड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी सभाओं और राजनीतिक बयानबाजी में कितना आगे बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।